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पर्किंसंस असल में दिमाग से जुड़ी एक बीमारी है, जिसकी वजह से डोपामाइन बनाने वाले नर्व सेल्स का विनाश हो जाता है। आम तौर पर, पर्किंसंस जैसी समस्या विशेष तौर पर नर्वस सिस्टम को बुरी तरीके से प्रभावित कर देती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि यह एक इस तरह की बीमारी होती है, जिसकी वजह से पूरे शरीर की गतिविधियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसमें विशेष तौर पर चलने में दिक्क्त और संतुलन न बना पाना शामिल होता है। आम तौर पर, इस तरह की समस्या से पीड़ित लोगों के शरीर का संतुलन काफी ज्यादा बिगड़ जाता है। इस तरह की समस्या में आखिर लोगों के साथ ऐसा क्यों होता है, इसके बारे में अभी तक कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है। दरअसल, इस तरह की स्थिति में एक व्यक्ति के सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर काफी ज्यादा बुरा असर पड़ता है। अब ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है, आखिर इस तरह की समस्या को किस तरीके से कंट्रोल में किया जा सकता है? असल में, आप कुछ योगासन के नियमित अभ्यास के माध्यम से पर्किंसंस जैसी बीमारी को नियंत्रण में रख सकते हैं, जिसमें ताड़ासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन जैसे कुछ योग शामिल हो सकते हैं। दरअसल, इनका रोजाना अभ्यास करने से न केवल पार्किंसंस डिजीज को बढ़ने से रोका जा सकता है, बल्कि इन से शरीर पर काफी हद तक संतुलन बनाकर भी रखा जा सकता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
पार्किंसंस रोग के लक्षण
आम तौर पर, पार्किंसंस बीमारी लोगों में एक आम समस्या बन गई है। हालांकि, इस समस्या के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। इसके लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि
- इस समस्या से प्रभावित लोगों के हाथ पैर कांपना।
- गतिविधियों का धीमा होना।
- मांसपेशियां का काफी ज्यादा सख्त हो जाना।
- शरीर का अजीब सा पोस्चर होना।
- संतुलन न बना पाना।
- बोलचाल में काफी बदलाव हो जाना।
- हाथ की लिखावट में काफी बदलाव हो जाना।
क्या योग से पार्किंसंस का इलाज संभव हो सकता है?
असल में, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि अगर पार्किंसंस जैसी समस्या की शुरुआत में ही आपको इसके लक्षण नज़र आने लगे, तो हाँ इस बीमारी को कुछ योगासन के माध्यम से भी कंट्रोल में किया जा सकता है। दरअसल, इस बात को तो लगभग सभी जानते ही होंगे, कि योग की अलग-अलग क्रियाओं को करने पर नसें और मांसपेशियां काफी ज्यादा मजबूत बनती हैं। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति के दौरान किसी भी तरह का कोई भी आसन या फिर एक्सरसाइज़ करने पर आपको काफी ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। इस तरह की समस्या से राहत पाने के लिए आप खुली हवा में कम से कम दो से तीन किलोमीटर चलें। इसके लिए स्विमिंग भी काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है। इस बीमारी को कंट्रोल में रखने के लिए आप ताड़ासन, पवनमुक्तासन और उत्तानपादासन, इन तीन योगआसन के इलावा नुरासन, भुजंगासन, नौकासन, गोमुखासन, शवासन, योगनिद्रा का भी अभयास कर सकते हैं। इनसे पार्किंसंस रोक के लक्षणों को कम किया जा सकता है।
पार्किंसंस बीमारी के मरीजों को अपने डेली रूटीन में ये योगासन ज़रूर शामिल करने चाहिए।
- ताड़ासन
आम तौर पर, पार्किंसंस जैसी बीमारी से पीड़ित लोगों को ताड़ासन करने से काफी ज्यादा फायदा मिल सकता है। दरअसल, इसके नियमित अभ्यास से पार्किंसंस के लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल में किया जा सकता है। ताड़ासन का अभ्यास करने के लिए आप सबसे पहले बिलकुल सीधे खड़े हो जाएँ, जिसमें आपकी दोनों पैर की एड़ियां एक- दूसरे के साथ टच करें। इसके बाद फिर अपने दोनों हाथों की हथेलियों को एक साथ जोड़ लें और फिर इसके बाद अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर की तरफ सीधा करें और अपने पंजों के बल पर खड़े हो जाएं। इसके बाद अब अपने दोनों हाथो को आराम से खोलें और की तरह लेकर आएं। इस आसान को करते वक्त जितना हो सके अपने शरीर को काफी ज्यादा स्ट्रेच करने की कोशिश करें। इस आसान से न केवल आपके पेट की मसल्स फिट रहती हैं, बल्कि उस को इससे सही शेप भी प्राप्त होती है। इसके इलावा, इससे घुटनों और टखनों की कैपेसिटी भी काफी ज्यादा बढ़ जाती है।
2 पवनमुक्तासन
दरअसल, पवनमुक्तासन न केवल पार्किंसंस को कंट्रोल में रखने में मदद करता है, बल्कि यह गैस, कब्ज और बवासीर जैसी समस्या से परेशान व्यक्तियों के लिए भी काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। आम तौर पर, इस का अभ्यास करने के लिए आप पीठ के बल बिलकुल सीधे होकर लेट जाएं और आराम -आराम से सांस लें। इसके बाद, अपने पैरों को आराम से एक साथ उठायें और पैर के घुटनों को मोड़ लें। अब अपने पैरों के घुटनों को छाती की तरफ लाएं और मुँह से टच करें। इसके बाद पैरों को हाथों की उंगलियों के साथ पूरी तरीके से जकड़ लें। इस दौरान, आपकी जांघ आपके पेट के साथ और पैर के घुटने आपकी नाक के साथ टच होने चाहिए। दरअसल, कम से कम इस स्थिति में 20 से 30 सेकंड तक ऐसे ही रहें और धीरे- धीरे आम स्थिति में वापिस आ जाएँ। इस आसन को दिन में कम से कम 5 से 10 बार करने पर आपको काफी ज्यादा लाभ प्राप्त हो सकता है। इससे पार्किंसंस को काफी कंट्रोल में रखा जा सकता है।
निष्कर्ष: पार्किंसंस बीमारी एक आम समस्या है, जो ज्यादातर अधिक उम्र के लोगों को प्रभावित करती है। यह एक दिमाग से जुड़ी बीमारी है, जिसमें एक व्यक्ति के सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है, जिसको ताड़ासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन जैसे योगआसन से कंट्रोल किया जा सकता है। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर जाकर इसके विशेषज्ञों से सम्पर्क कर सकते हैं।