यह 5 फ़ूड करते है दिमाग की नसों को कमज़ोर, जाने एक्सपर्ट्स से दिमाग को कैसे रखे हेअल्थी

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यह 5 फ़ूड करते है दिमाग की नसों को कमज़ोर, जाने एक्सपर्ट्स से दिमाग को कैसे रखे हेअल्थी

हमारा दिमाग शरीर के बाकी अंगों में से एक जटिल अंग होता है, जो शरीर के हर अंग के कार्य को नियंत्रित करता है | दिमाग के स्वास्थ्य का हमेशा ख्याल रखना चाहिए इसके लिए सही खानपान बेहद ज़रूरी होता है | लेकिन कुछ खाद पदार्थ ऐसे भी होते है जिसके सेवन से दिमाग की नसों को कमज़ोर हो जाती है | आइये जानते है 5 ऐसे ही फूस के बारे में :- 

 

  1. प्रक्रिया भोजन :- प्रक्रिया भोजन यानी प्रोसेस्ड फ़ूड में उच्च स्तर में सोडियम, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा का प्रयोग किया जाता है, जिसके सेवन से दिमाग की नसों को काफी नुस्कान पहुँचता है और याददाश्त तक कमज़ोर हो जाती है | 

 

  1. ट्रांस फैट भोजन :- यह भोजन आमतौर पर प्रोसेस्ड फ़ूड में पाया जाता है |  जिसके सेवन से दिमाग की नसों में सूजन आ जाती है और डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ जाता है | 

 

  1. चीनी का अधिक सेवन करना :- चीनी के अत्यधिक सेवन से दिमाग को अधिक सक्रिय कर देती है | क्योंकि ग्लूकोस दिमाग के लिए ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत होता है, लेकिन इसमें पायी जाने वाली चीनी पदार्थ दिमाग को ओवरड्राइव मोड में डाल सकती है | 

 

  1. शराब का अधिक सेवन करना :- शराब जैसी नशीली पदार्थों का सेवन करने से दिमाग की नसों पर काफी नकारात्मक प्रभाव डालते है, जिसकी वजह से ब्रेन स्ट्रोक होने और मनोभ्रंश विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है | 

 

  1. कैफीन का अधिक सेवन करना :- कैफीन में उत्तेजित जैसे पदार्थ पाए जाते है, जिसके अधिक सेवन से दिमाग में चिंता और अवसादों के लक्षण को ख़राब कर देते है और रक्तस्राव का स्तर भी बढ़ जाता है | 

 

इन खाद पदार्थ के अलावा अन्य कारक ऐसे भी होते है, जो दिमाग की नसों को कमज़ोर कर देते है, जैसे की धूम्रपान करना, तनाव में रहना और प्रदुषण | इसलिए यह ज़रूरी है की आप इन खाद पदार्थो का सेवन कम करे और बेहतर जीवनशैली के लिए अच्छे खानपान को अपनाये | इससे जुडी कोई भी जानकारी या अपने विचारों का विमर्श करना चाहते है तो आप न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर का चयन कर सकते है | इस संस्था के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर अमिता मित्तल न्यूरोलॉजिस्ट में एक्सपर्ट्स है, जो आपकी समस्या को कम करने में आपकी सहायता करेंगे |

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पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को होता है माइग्रेन की समस्या, आइये जानते है डॉक्टर से क्या है इसके कारण

हल्का सिरदर्द तो आजकल लगभग हर व्यक्ति को होता है,वही कुछ लोग को गंभीर सिरदर्द या फिर माइग्रेन जैसी समस्या से गुजरना पड़ता है | लेकिन क्या आपको यह बात पता है की पुरूषों की तुलना में महिलाओं को  माइग्रेन होने खतरा ज़्यादा होता है | 

न्यूरो लाइफ ब्रेन & स्पाइन सेंटर के सीनियर कंसलटेंट डॉ अमित मित्तल जो की ब्रेन और स्पाइन सर्जन में एक्सपर्ट है, उनका कहना है की महिलाओं में हार्मोनल के उतर-चढ़ाव पुरुषों को तुलना में अधिक होता है, जिससे उनमे माइग्रेन जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती  है | माइग्रेन एक ऐसा सिरदर्द है जो आमतौर पर  सिर के एक तरफ से शुरू होता है | इसके मुख्य लक्षण है मल्टी या उलटी होना, प्रकाश और शोर जैसे पर्यावरण से सवेदनशील होना आदि  | आमतौर पर यह सिरदर्द 4 घंटे से अधिक समय तक नहीं रहता, परंतु कुछ लोगों में यह सिरदर्द 2 -3 दिन तक रहता है | 

डॉ अमित मित्तल ने बताया की पीरियड्स के दौरान भी माइग्रेन स्थिति को बिगाड़ देती है | पीरियड्स के दौरान  महिलाओं के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन काफी अधिक मात्रा में होता है | इस साइकिल की वजह से एस्ट्रोजन नाम के हार्मोन्स माइग्रेन को ट्रिगर करते है , जो की सिरदर्द का कारण  बनता है | कई महिलाएं हार्मोन को कण्ट्रोल करने की दवा का सेवन करते है, लेकिन इन दवाओं के सेवन से माइग्रेन होने का रिस्क अधिक हो जाता है | 

एक आंकड़े के अनुसार दुनियाभर में 18-40 वर्ष की महिलाओं में माइग्रेन की समस्या अधिक पायी गयी है, जिसका सही समय पर इलाज करवाना बेहद आवश्यक है | अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे है तो आप न्यूरो लाइफ ब्रेन & स्पाइन सेंटर का चयन कर सकते है | जिससे आपको इस समस्या से जल्द से जल्द छुटकारा पाने में मदद मिल सकती है |

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ब्रेन टीबी के क्या है लक्षण और इलाज के तरीके ?

डॉक्टरों का कहना है की ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो ज्यादातर फेफड़ों को प्रभावित करता है। अगर इस जानलेवा बीमारी का सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो यह मौत का कारण भी बन सकता है। इसके अलावा ब्रेन टीबी की समस्या क्यों होती है, इसके लक्षण क्या है और इससे हम कैसे खुद का बचाव कर सकते है इस बात पर खास ध्यान रखें ;

क्या है ब्रेन टीबी ?

  • दरअसल टीबी की बात करें तो ये सिर्फ फेफड़े में ही नहीं दिमाग को भी प्रभावित कर सकती है। आपको बता दें कि टीबी के बैक्टीरिया धीरे-धीरे ब्रेन में प्रवेश करते है और एक गांठ का निर्माण करते है। 
  • यही गांठ बाद में टीबी का रूप ले लेती है, जिससे मस्तिष्क की झिल्लियों में सूजन या गांठ विकसित होने लगती है। और इस गांठ को मेनिन्जाइटिस ट्यूबरकुलोसिस, मेनिन्जाइटिस या ब्रेन टीबी के नाम से जाना जाता है।
  • अगर आप भी इस तरह की समस्या का सामना कर रहें है तो इससे बचाव के लिए आपको जल्द लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट के संपर्क में आना चाहिए।

ब्रेन टीबी के लक्षण क्या है ?

  • इसके लक्षण शुरुआती दौर में तो सामान्य होते है, लेकिन जैसे-जैसे आपके द्वारा लापरवाही की जाती है वैसे ही इसके लक्षणा गंभीर हो जाते है। वहीं इसके सामान्य लक्षण में थकान और अस्वस्थता नज़र आती है। 
  • और इसके गंभीर लक्षण होने पर आपको गर्दन में अकड़न, सिरदर्द और हल्की संवेदनशीलता का महसूस होना। इसके अलावा, आप निम्न लक्षणों का अनुभव भी कर सकते है, जैसे :
  • बुखार की समस्या। 
  • उलझन महसूस होना। 
  • मतली और उल्टी की समस्या का सामना करना। 
  • सुस्ती का आना। 
  • चिड़चिड़ेपन की समस्या का सामना करना। 
  • बेहोशी की हालत में होना आदि।

अगर इसके लक्षण ज्यादा गंभीर नज़र आ रहें है और आपके दिमाग पर इसका गहरा असर पड़ रहा है, तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन का चयन करना चाहिए।

क्यों होती है ब्रेन टीबी की समस्या ?

  • वैसे देखा जाए तो दिमाग के टीबी की समस्या एक-दूसरे से नहीं फैलती लेकिन, जब फेफड़ों की टीबी से संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता है तो उसके मुंह से निकली बूंदें दूसरे व्यक्ति के अंदर आसानी से प्रवेश कर जाते है। 
  • वहीं ये बूंदें यदि दिमाग में प्रवेश कर जाती है, तो व्यक्ति के दिमाग में टीबी या ब्रेन टीबी होने की संभावना और अधिक बढ़ जाती है।

सुझाव :

ब्रेन में टीबी का होना काफी खतरनाक माना जाता है, क्युकी इससे आपके जान जाने का भी भय हो सकता है, इसलिए जरूरी है की इसके लक्षण ज्यादा गंभीर होने से पहले आपको न्यूरो लाइफ ब्रेन एन्ड स्पाइन सेंटर के सम्पर्क में आना चाहिए।

ब्रेन टीबी का पता किन टेस्टों के माध्यम से लगाया जा सकता है ?

  • मेनिन्जेस की बायोप्सी को करवाकर आप इस बीमारी का पता लगा सकते है।
  • ब्लड कल्चर से भी। 
  • छाती का एक्स-रे करवा कर भी। 
  • सिर का सीटी स्कैन करवाना। 
  • ट्यूबरक्लोसिस के लिए त्वचा का टेस्ट करवाना आदि।

इलाज क्या है ब्रेन टीबी का ?

  • ब्रेन टीबी के इलाज में डॉक्टर पहले कुछ दवाओं के माध्यम से मरीज का इलाज करना शुरू करते है। यदि दवाओं से आराम नहीं मिलता है तब डॉक्टर थेरेपी कराने का सुझाव देते है।
  • ब्रेन ट्यूबरकुलोसिस या ब्रेन टीबी को डॉक्टर दो मुख्य प्रकार से सर्जरी कराने की सलाह देते है, ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस और ब्रेन ट्यूबरकुलोमा से जुड़े हाइड्रोसिफ़लस है। ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस अक्सर चिकित्सा उपचार के प्रति प्रतिक्रिया करता है, लेकिन चिकित्सा उपचार में असफल होने वालों के लिए तुरंत सर्जरी की आवश्यकता होती है। 
  • वेंट्रिकुलोपेरिटोनियल (वीपी) शंट और एंडोस्कोपिक थर्ड वेंट्रिकुलोस्टॉमी (ईटीवी) दोनों सर्जरी का सुझाव डॉक्टर द्वारा दिया जा सकता है।
  • हालांकि बाद वाला क्रोनिक हाइड्रोसिफ़लस के रोगियों में तीव्र मेनिन्जाइटिस की तुलना में अधिक बार सफल होता है। अन्य रोगियों की तुलना में टीबीएमएच के रोगियों में वीपी शंट के बाद जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है। 
  • इसके अलावा डॉक्टर मरीज की स्वास्थ्य स्थिति के बाद ही सर्जरी का निर्णय लेते है।

निष्कर्ष :

मस्तिष्क जोकि बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है, व्यक्ति के शरीर में इसलिए जरूरी है की इसका सही से कार्य करना बहुत जरूरी है और ये सही से कार्य तभी कर सकता है, जब आपके द्वारा इसका अच्छे से ध्यान रखा जाएगा।  

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न !

मस्तिष्क सर्जरी से जुड़े जोखिम और लाभ क्या हैं?

मस्तिष्क में सर्जरी के बाद मरीजों को मस्तिष्क की चोट, मस्तिष्क में सूजन और स्ट्रोक के कारण होने वाली गंभीर जटिलताओं का खतरा हो सकता है। वही इसके लाभ की बात करें, तो इस सर्जरी की मदद से आपकी हर तरह की दिमागी समस्या ठीक हो सकती है।

यदि दवा से सुधार नहीं हो रहा है तो क्या स्पाइनल टीबी का सर्जरी ही एकमात्र समाधान है ?

कई बार टीबी के कारण रीढ़ की हड्‌डी में ज्यादा क्षति पहुंचने लगती है, ऐसी गंभीर स्थिति में सर्जरी ही इसका एकमात्र इलाज है, जिसे स्पाइनल फ्यूजन ऑपरेशन किया जाता है।

क्या एक्सडीआर टीबी के इलाज में सर्जरी अनिवार्य है ?

 इलाज दवा प्रतिरोध की सीमा, रोग की गंभीरता और क्या रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली से समझौता किया गया है, इस पर निर्भर करता है। इसलिए सर्जरी का सहारा स्थिति गंभीर होने पर ही किया जाता है। 

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मिर्गी के दौरे को ठीक करने के लिए प्राथमिक उपचार क्या है ?

मिर्गी के दौरे के लिए प्राथमिक उपचार दौरे का अनुभव करने वाले व्यक्ति की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। जब किसी को दौरा पड़े तो यहां कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने चाहिए, और साथ ही इन कदमों को उठा कर आप कैसे खुद से मिर्गी के दौरे का बचाव कर सकते है इसके बारे में चर्चा करेंगे ; 

दौरा पड़ने पर कौंन-से महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए ? 

शांत रहें – 

सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात शांत रहना है। हालाँकि दौरे देखने में डरावने हो सकते है, लेकिन दिमाग को संतुलित रखना ज़रूरी है।

व्यक्ति की रक्षा करें –

यदि व्यक्ति पहले से ही जमीन पर नहीं है, तो उसे बैठने में मदद करें या किसी भी चोट से बचने के लिए उसे अपनी तरफ धीरे से लिटा दें। उन्हें दबाकर न रखें या उनकी गतिविधियों पर प्रतिबंध न लगाएं।

क्षेत्र साफ़ करें –

सुनिश्चित करें कि आस-पास कोई नुकीली या खतरनाक वस्तु न हो जिससे दौरे के दौरान व्यक्ति संभावित रूप से खुद को घायल कर सके। सुरक्षित स्थान बनाने के लिए सभी बाधाओं को दूर करें।

सिर को गद्देदार रखें – 

व्यक्ति के सिर के नीचे मुड़ा हुआ जैकेट या तकिया जैसी कोई नरम वस्तु रखें ताकि वह इसे फर्श से टकराने से रोक सके।

तंग कपड़ों को ढीला करें – 

यदि व्यक्ति के कपड़े उसकी गर्दन या छाती के आसपास तंग है, तो उचित वायु प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए इसे ढीला करने का प्रयास करें।

दौरे का समय नोट करें –

दौरे के शुरू होने का समय नोट करना सहायक होता है। इससे बाद में जरूरत पड़ने पर चिकित्सा पेशेवरों को मदद मिलेगी।

उनके मुँह में कुछ भी न डालें – 

आम धारणा के विपरीत, दौरे के दौरान व्यक्ति के मुँह में अपनी उंगलियाँ या चम्मच सहित कुछ भी डालने की सलाह नहीं दी जाती है। क्युकी इससे चोट लग सकती है। 

उनके साथ रहें –

जब तक दौरा ख़त्म न हो जाए, तब तक व्यक्ति के पास रहें और उन पर कड़ी नज़र रखें। यदि दौरा ख़त्म होने पर वे सचेत है, तो उन्हें शांति से आश्वस्त करें।

दौरे के बाद – 

दौरे के समाप्त होने के बाद, व्यक्ति को आरामदायक स्थिति में लाने में मदद करें और सुनिश्चित करें कि वे सामान्य रूप से सांस ले रहे है। वे भ्रमित हो सकते हैं, इसलिए आश्वासन और आराम प्रदान करें।

चिकित्सा सहायता लें – 

कुछ मामलों में, विशेष रूप से यदि यह व्यक्ति का पहला दौरा है या यह पांच मिनट से अधिक समय तक रहता है, या यदि उन्हें बाद में सांस लेने में कठिनाई होती है, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें। अगर दौरे के दौरान आपकी सेहत पर कुछ गलत प्रभाव पड़ने लगे तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

सहायक बने रहें – 

जब तक व्यक्ति पूरी तरह से सतर्क और ठीक न हो जाए, तब तक उसके साथ रहना जारी रखें। दौरे के बाद वे थका हुआ या भ्रमित महसूस कर सकते है, और वहां किसी अपने के होने का आश्वस्त कर सकता है आपको।

दौरे के बारे में लिखे – 

यदि संभव हो, तो दौरे के बारे में कोई भी विवरण लिखें, जैसे कि इसकी अवधि, दौरे शुरू होने से पहले व्यक्ति क्या कर रहा था, और दौरे के दौरान कोई असामान्य व्यवहार। यह जानकारी चिकित्सा पेशेवरों के लिए उपयोगी हो सकती है।

मिर्गी के दौरे पर डॉक्टरी सहायता कब लें !

  • व्यक्ति जब 5 मिनट से अधिक समय तक बेहोश रहा हो। 
  • दौरा पांच से दस मिनट या उससे अधिक समय तक जारी रह सकता है।
  • ऐसा लगता है कि दौरा अधिक समय तक नहीं रहता है, लेकिन फिर भी व्यक्ति ठीक नहीं हो पाता है।
  • व्यक्ति को चलने और सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
  • व्यक्ति काफी देर तक सो चुका है और जाग नहीं रहा है।
  • व्यक्ति को तुरंत दूसरे दौरे का अनुभव हुआ (पहले दौरे के तुरंत बाद)।
  • व्यक्ति को बुखार है और उसके हाथ-पैरों में अकड़ आ गई हो।
  • व्यक्ति कमजोर, सुस्त और उल्टी करने लगें।
  • दौरे के दौरान व्यक्ति को चोट लगी हो।
  • जिस व्यक्ति को दौरे पड़ रहे है, वह मधुमेह से पीड़ित है या उसे हृदय रोग या उच्च रक्तचाप जैसी अन्य संबंधित स्वास्थ्य स्थितियाँ है। तब आपको डॉक्टर का चयन करते वक़्त देरी नहीं करना चाहिए।

यदि दौरे के दौरान आपकी स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाए, तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन का चयन करना चाहिए।

ध्यान रखें :

अगर आपको दौरा गंभीर रूप से पड़े तो कृपया उसे नज़रअंदाज़ न करें बल्कि समय पर आपको इसके इलाज के लिए न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर का चयन करना चाहिए। वहीं अगर आपको दौरा पहली बार पड़ा है तो इसके लिए आप डॉक्टरी सलाह भी लें सकते है।

सारांश :

उन्हें रोकने या उनके मुँह में कोई वस्तु डालने का प्रयास न करें। यदि आवश्यक हो तो चिकित्सा सहायता लें और व्यक्ति के ठीक होने पर उसके लिए मौजूद रहें। मिर्गी का दौरा भयावह हो सकता है, लेकिन सही प्राथमिक उपचार से, आप दौरे का अनुभव करने वाले व्यक्ति के लिए सुरक्षित परिणाम सुनिश्चित करने में मदद कर सकते है। 

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जानिए क्या है ब्रेन और स्पाइन डिसऑर्डर्स और कैसे किया जाता है इनका उपचार?

ब्रेन और स्पाइन डिसऑर्डर्स की अगर बात करें तो दोनों ही हमारे शरीर से जुड़े हुए भाग है। वही ब्रेन और स्पाइन डिसऑर्डर्स की समस्या किन कारणों से होती है और इनको हम कैसे ठीक कर सकते है इसके बारे में आज के लेख में चर्चा करेंगे, तो आप भी अगर इस तरह की समस्या का सामना कर रहें है तो इससे बचाव के लिए आर्टिकल के साथ अंत तक बने रहें ;

क्या है ब्रेन और स्पाइन डिसऑर्डर्स ?

  • “ब्रेन डिसऑर्डर्स” की बात करें तो ये व्यक्ति को तब प्रभावित करते है जब व्यक्ति का मस्तिष्क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाता है, वही जब दिमाग क्षतिग्रस्त होता है तो यह आपकी स्मृति, आपकी संवेदना और यहां तक ​​कि आपके व्यक्तित्व सहित कई अलग-अलग चीजों को प्रभावित कर सकता है। 
  • इसके अलावा “स्पाइन डिसऑर्डर्स” की अगर बात करें तो ऐसा होने पर आपको कंधे से लेकर गर्दन और कमर में दर्द की शिकायत हो सकती है, आप गर्दन और पीठ में दर्द, जलन या चुभन सी महसूस कर सकते है। ब्लैडर या आंत में खराबी, जी मिचलाना, उल्टी और हाथ-पैरों मे दर्द की समस्या हो सकती है, पैरालाइज, हाथ-पैरों का सुन्न पड़ना भी स्पाइन डिसॉर्डर के अंतर्गत ही आते है।

ब्रेन और स्पाइन डिसऑर्डर्स के बारे में विस्तार से जानने के लिए लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट का चुनाव करें।

ब्रेन और स्पाइन डिसऑर्डर्स के लक्षण क्या है ? 

  • “स्पाइन डिसऑर्डर्स” की बात करें तो इसमें रीढ़ की हड्डी का सुन्न होना शामिल है। 
  • कमज़ोरी की समस्या। 
  • गर्दन या पीठ में हल्के या तेज जलन वाले दर्द का अनुभव करना। 
  • उल्टी या मतली की समस्या। 
  • कंधे या पीठ का गोल होना। 
  • आंत्र या मूत्राशय की शिथिलता का सामना करना।
  • “ब्रेन डिसऑर्डर्स” की बात करें तो इसमें सिर दर्द, चेहरे, हाथ या पैर में अचानक सुन्नता या कमजोरी, खासकर शरीर के एक तरफ।
  • अचानक भ्रम की स्थिति का सामना करना। 
  • बोलने में परेशानी का सामना करना। 
  • भाषण समझने में कठिनाई का सामना करना। 
  • एक या दोनों आँखों से देखने में अचानक परेशानी। 
  • चलने में अचानक परेशानी, या चक्कर का आना।

ब्रेन और स्पाइन डिसऑर्डर्स का इलाज क्या है ?

  • स्पाइन डिसऑर्डर्स की यदि बात करें तो इस समस्या की वजह से किसी इंसान को स्पाइनल ट्यूमर हो सकता है और जब ट्यूमर की समस्या होती है तो इसके लिए व्यक्ति को सर्जरी करानी पड़ सकती है और इस सर्जरी में रेडिएशन थैरेपी या कीमोथैरेपी की जा सकती है। इसके अलावा अन्य स्पाइन डिसॉर्डर के लिए बैक ब्रेसिंग, इंजरी के लिए आइस या हीट थैरेपी, इंजेक्शन, दवाएं, पीठ या पेट की मांसपेशियों की मजबूती के लिए फिजिकल थैरेपी जैसे विकल्प मौजूद है। 
  • ब्रेन डिसऑर्डर्स की बात करें तो इसमें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को प्रबंधित करने और भावनात्मक समर्थन प्रदान करने के परामर्श और संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी। अल्जाइमर और मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी कुछ स्थितियों के लक्षणों में सुधार करने और स्ट्रोक की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए आहार, व्यायाम और तनाव प्रबंधन। 

यदि आपको अपने ब्रेन और स्पाइन डिसऑर्डर्स का इलाज सर्जरी के माध्यम से करवाना है तो इसके लिए आप लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन का चयन करें।

ब्रेन और स्पाइन डिसऑर्डर्स के लिए बेस्ट हॉस्पिटल व सेंटर !

अगर आपके ब्रेन या स्पाइन के हिस्से में किसी तरह की गंभीर चोट लग गई है, तो इससे बचाव के लिए आपको न्यूरो लाइफ ब्रेन एन्ड स्पाइन सेंटर के अनुभवी डॉक्टरों और सर्जनों का चयन करना चाहिए ताकि आपको आपकी समस्या का हल मिल सकें।

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ब्रेन ट्यूमर (मस्तिष्क में गांठ) के लक्षण क्या है? यह कैसे ठीक होता है?

ब्रेन ट्यूमर जिसे मस्तिष्क में गांठ के नाम से भी जाना जाता है, वही ये ट्यूमर अगर व्यक्ति के दिमाग में हो जाए तो उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा मस्तिष्क में गांठ को कैसे पहचाने और इसके कारण क्या है और इससे हम अपना बचाव कैसे कर सकते है इसके बारे आज के आर्टिकल में चर्चा करेंगे। तो आप भी अगर ब्रेन में गांठ को जानकर इससे बचाव करना चाहते है तो इसके लिए आर्टिकल के साथ अंत तक जरूर बने रहें ;

मस्तिष्क में गांठ के कारण क्या है ?

  • शरीर या मस्तिष्क पर की गई पुरानी रेडिएशन थेरेपी की वजह से ब्रेन ट्यूमर होने का ख़तरा बढ़ जाता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रेन ट्यूमर के ख़तरे को कम करने के लिए वयस्कों और बच्चों को अपने सेल फोन के उपयोग को सीमित करना चाहिए और हो सके तो हैंड्स-फ्री हेडफ़ोन का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
  • घर और कार्यस्थल का वातावरण भी व्यक्ति को कैंसर की समस्या में डाल सकता। 
  • पारिवारिक इतिहास भी कही न कही ब्रेन ट्यूमर के कारणों में शामिल है। 
  • ब्रेन ट्यूमर होने के कारण में उम्र को भी एक महत्वपूर्ण जरिया माना जाता है। 

मस्तिष्क में गांठ या कैंसर के कारणों के बारे में विस्तार से जानने के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

मस्तिष्क में गांठ या ब्रेन ट्यूमर किसे कहा जाता है ?

  • ब्रेन ट्यूमर आपके मस्तिष्क में असामान्य कोशिकाओं की एक गांठ के रूप में मानी जाती है। 
  • इसके अलावा ब्रेन ट्यूमर की बात करें तो इसे प्राथमिक (primary) और द्वितीय (secondary) ब्रेन ट्यूमर में बाटा जाता है। 
  • वही प्राथमिक ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि के कारण ही ये बनते है, जबकि द्वितीय ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क की कोशिकाओं को छोड़कर शरीर की अन्य कोशिकाओं से विकसित होते है।

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण क्या है ?

  • सिर में दर्द या दबाव जो सुबह के समय अधिक होता है।
  • अक्सर मतली या उल्टी की समस्या का सामना करना। 
  • आंखों की समस्याएं, जैसे धुंधला दिखाई देना या दोहरी दृष्टि।
  • एक हाथ या एक पैर का ठीक से काम न करना।
  • शारीरिक व मानसिक संतुलन को बनाए रखने में परेशानी का सामना करना। 
  • बहुत थकान महसूस करना।
  • स्मृति या याद रखने में समस्या का सामना करना। 
  • मूड या फिर व्यवहार में परिवर्तन। 
  • दौरे का पड़ना आदि।

यदि आपके ये लक्षण गंभीर रूप धारण कर लें, और जिसकी वजह से आपको अपने दिमाग की सर्जरी करवानी पड़े, तो इसके लिए आप लुधियाना में बेस्ट न्यूरो सर्जन से संपर्क कर सकते है। पर सर्जरी का फैसला बिना डॉक्टर के सलाह पर न लें।

कैंसर के लिए बेस्ट हॉस्पिटल व सेंटर !

अगर आपके दिमाग में ब्रेन ट्यूमर ने हमला कर दिया है तो इससे बचाव के लिए आपको न्यूरो लाइफ ब्रेन एन्ड स्पाइन सेंटर के अनुभवी सर्जन का चयन करना चाहिए। लेकिन दिमाग में किसी भी तरह की सर्जरी को करवाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 

ब्रेन ट्यूमर से कैसे करें खुद का बचाव ?

  • ब्रेन ट्यूमर में अनुभवी सर्जन व डॉक्टर आपके दिमाग की सर्जरी करते है और सर्जरी के साथ वो रेडिएशन और कीमोथेरेपी आदि का भी प्रयोग करते है। 
  • वही डॉक्टरों का कहना है की व्यक्ति धूम्रपान और रेडिएशन जैसे जोखिमों से बचकर ब्रेन ट्यूमर के जोखिमों को कम कर सकते है।

निष्कर्ष :

मस्तिष्क में गांठ या ब्रेन ट्यूमर की समस्या को काफी खतनाक माना जाता है, इसलिए जरूरी है की अगर आपको इसके लक्षण नज़र आने लगे तो बिना समय गवाए आप डॉक्टर के संपर्क में आए। इसके अलावा किसी भी तरह के उपचार को खुद से न अपनाएं, जब तक डॉक्टर के द्वारा उसे मंजूरी न दी जाए।

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रीढ़ की हड्डी में दर्द के क्या है – कारण, लक्षण और उपाय ?

रीढ़ की हड्डी हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगो में से एक है अगर किसी कारण वश इनमे परेशानी आ जाए तो ये हमारे पूरे शरीर की गतिविधियों व तालमेल को ख़राब कर देती है। पर रीढ़ की हड्डी में दर्द की समस्या क्यों होती है और इसको हम कैसे ठीक कर सकते है इसके बारे में आज के इस आर्टिकल में बात करेंगे ;

रीढ़ की हड्डी में दर्द की समस्या क्यों उत्पन होती है ?

  • रीढ़ की हड्डी में यदि किसी प्रकार की क्षति पहुंचती है तो इससे व्यक्ति के जीवन पर काफी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। 
  • वही कई प्रकार की चोट और बीमारियों की वजह से रीढ़ की हड्डी का सेहत पर फर्क पड़ता है। यदि इन चोटों का समय रहते ध्यान न दिया जाए तो ये आगे चल के भयंकर बीमारी का रूप धारण कर सकती है।  

क्या है रीढ़ की हड्डी ?

  • मानव शरीर के रचना में ‘रीढ़ की हड्डी’ या मेरुदंड या बैकबोर्न, पीठ की हड्डियों का समूह है जो मस्तिष्क के पिछले भाग से निकलकर गुदा के पास तक जाती है। इसमें 33 खण्ड होते हैं। तो वही रीढ़ की हड्डी मेरुदण्ड के भीतर ही मेरूनाल में मेरूरज्जु के पास सुरक्षित रहता है।
  • जवान उम्र के लोगों में इसकी लंबाई आमतौर पर 40 सेंटीमीटर और चौड़ाई 2 सेंटीमीटर तक होती है। वही इसकी संरचना की बात करे तो इसमें कई सारी नसें और सेल्स रहते हैं जो कि हमारे दिमाग से पूरे शरीर तक संदेश पहुंचाते हैं।

रीढ़ की हड्डी में दर्द के लक्षण क्या है ?

  • कमर के निचले हिस्से में दर्द और कुछ मौकों पर जकड़न का एहसास होना।
  • इस प्रकार का दर्द कुछ लोगों को रात में भी परेशान करता है।
  • कभी-कभी चलने फिरने या एक्सरसाइज के बाद भी दर्द बढ़ जाता है।
  • इसके अलावा कई बार दर्द कमर से होते हुए कुल्हें तक भी जा पहुँचता है।
  • कई ऐसे लोग हैं जिन्हें ऐसे मौके पर सुन्नता का एहसास होता है।
  • सुबह उठते वक़्त कमर में तेज दर्द का होना।

यदि रीढ़ की हड्डी के लक्षण ज्यादा गंभीर नज़र आ रहे है तो बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करे।

रीढ़ की हड्डी को दर्द से बचाने के उपाय क्या है ?

  • रीढ़ की हड्डी को बेहतर बनाने के लिए स्वस्थ खानपान का सेवन करे। 
  • अपनी डाइट में ताज़ा फल, सब्जियां, दालें और प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करें। अपनी जीवनशैली में व्यायाम को जरूर शामिल करे। 
  • सीधे चलने एवं सीधे खड़े रहने की आदत डालें। ज्यादा झुक कर बैठने से बचें। धूम्रपान व शराब के सेवन से बचें। सोते समय अपनी पोजी़शन को व्यवस्थित रखें। यदि आपको पेट के बल सोने की आदत है तो इस आदत को ज़रूर बदले। 
  • यदि आप लंबे समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं तो अपने बैठने की पोजी़शन को बदलते रहे। ज़्यादा लंबे समय तक यदि आप ड्राइव कर रहे है तो अपनी पीठ के पीछे तकिए का सहारा ले।

इन उपायों को अपनाने के बाद भी आपको दर्द से राहत नहीं मिल रहा तो आप न्यूरो लाइफ ब्रेन एन्ड स्पाइन सेंटर का चयन करे, अपनी रीढ़ की हड्डी के इलाज के लिए।

निष्कर्ष :

यदि रीढ़ की हड्डी में दर्द ज्यादा बना हुआ है, तो इसके लिए अनुभवी डॉक्टरों के सलाह पर बेहतरीन इलाज व दवाइयों का विकल्प चुने। क्युकि शुरुआती दौर के दर्द को कंट्रोल करना आसान है, नहीं तो बाद में चलकर ये भयंकर रूप धारण कर सकता है।

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ब्रेन स्ट्रोक से पहले दिखने वाले शुरुआती लक्षणों के बारे में क्या कहना है डॉक्टरों का ?

चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में, संभावित मस्तिष्क स्ट्रोक के चेतावनी संकेतों को समझना समय पर हस्तक्षेप के लिए महत्वपूर्ण है। डॉक्टर इन प्रारंभिक लक्षणों को पहचानने के महत्व पर जोर देते है, क्योंकि शीघ्र पता लगाने से सफल उपचार की संभावना में काफी सुधार हो सकता है। तो इस लेख में, हम मस्तिष्क स्ट्रोक से पहले के प्रारंभिक संकेतकों के संबंध में चिकित्सा पेशेवर आमतौर पर क्या निरीक्षण करते है और क्या सलाह देते है, इस पर चर्चा करेंगे ;

ब्रेन स्ट्रोक से पहले के शुरुआती लक्षण क्या है ?

  • सबसे पहले, डॉक्टर अचानक और गंभीर सिरदर्द पर ध्यान देने के महत्व पर जोर देते है। जो लोग असामान्य, तीव्र सिरदर्द का अनुभव कर रहे है, जो कहीं से भी प्रकट होता है, उन्हें इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। जबकि सिरदर्द आम और अक्सर सौम्य होते है, अचानक और गंभीर सिरदर्द एक खतरे का संकेत हो सकता है। यह लगातार असुविधा मस्तिष्क में रक्त वाहिका में रुकावट या टूटने की संभावना का संकेत दे सकती है, जिसके लिए तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है। यदि गंभीर सिर दर्द की समस्या से आप खुद का बचाव करना चाहते है तो इसके लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट का चयन जरूर से करना चाहिए।
  • डॉक्टरों द्वारा उजागर किया गया एक और प्रचलित प्रारंभिक लक्षण चेहरे की कमजोरी या सुन्नता है, खासकर चेहरे के एक तरफ। जब चेहरे की मांसपेशियां अचानक झुक जाती है या संवेदना खो देती है, तो यह आसन्न स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। चिकित्सा पेशेवर व्यक्तियों को चेहरे की मांसपेशियों को हिलाने में किसी भी विषमता या कठिनाई की जांच करने के लिए मुस्कुराकर एक सरल परीक्षण करने की सलाह देते है। यदि ऐसे संकेत मौजूद है, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है।
  • बोलने में कठिनाई को भी डॉक्टर अक्सर संभावित स्ट्रोक के संकेत के रूप में उद्धृत करते है। अस्पष्ट वाणी, सुसंगत वाक्य बनाने में कठिनाई, या संचार में अचानक भ्रम मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह में व्यवधान का संकेत दे सकता है। इन वाणी-संबंधी लक्षणों को पहचानना महत्वपूर्ण है, और व्यक्तियों या उनके आसपास के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।
  • इसके अलावा, डॉक्टर अक्सर अचानक दृष्टि समस्याओं के महत्व पर जोर देते है। धुंधला या दोहरी दृष्टि, एक या दोनों आँखों में दृष्टि की हानि, या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई प्रारंभिक चेतावनी संकेत हो सकते है। कुछ मामलों में, व्यक्तियों को दृश्य गड़बड़ी के साथ अचानक और गंभीर सिरदर्द का अनुभव हो सकता है, जो चिकित्सा सहायता लेने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।
  • संतुलन और समन्वय के मुद्दे भी मस्तिष्क स्ट्रोक के संदर्भ में डॉक्टरों द्वारा चर्चा किए जाने वाले उल्लेखनीय लक्षण है। अचानक चक्कर आना, संतुलन खोना या चलने में कठिनाई मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति समन्वय की अस्पष्ट कमी का अनुभव करता है, खासकर जब अन्य लक्षणों के साथ संयुक्त हो, तो तुरंत स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना आवश्यक है।

ब्रेन स्ट्रोक के कारण क्या है ?

  • जिस प्रकार से हार्ट में रक्त की आपूर्ति कम होने पर हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। 
  • ठीक उसी तरह से ब्रेन स्ट्रोक के भी दो मुख्य कारण माने जाते है। इसके सामान्य कारणों में इस्केमिक स्ट्रोक को शामिल किया जाता है। यह तब होता है जब ब्रेन में रक्त की आपूर्ति में किसी तरह की समस्या आने लगती है। ब्रेन में ब्लड की सप्लाई में आने वाली बाधा टिश्यू को डैमेज कर सकती है। 
  • इसके अलावा रक्त को ब्रेन तक पहुंचाने वाली नसे फटने के कारण भी ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। 
  • स्ट्रोक जोखिम कारकों में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज मेलेटस, धूम्रपान, हाई कोलेस्ट्रोल, शराब का अधिक सेवन करना और शारीरिक गतिविधियों में कमी आदि को शामिल किया जाता है। 

यदि ब्रेन स्ट्रोक आने का खतरा आपमें भी बना हुआ है, तो इसके लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन का चयन जरूर से करना चाहिए।

याद रखें :

स्वास्थ्य के मामले में समय बहुत महत्वपूर्ण है और शीघ्र कारवाही से बहुत फर्क पड़ सकता है, तो अगर आपको लगें की आप ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों को महसूस कर रही है, तो इससे बचाव के लिए आपको न्यूरो लाइफ ब्रेन एन्ड स्पाइन सेंटर का चयन करना चाहिए।

निष्कर्ष :

अचानक और गंभीर सिरदर्द, चेहरे की कमजोरी या सुन्नता, बोलने में कठिनाई, दृष्टि समस्याएं और संतुलन संबंधी समस्याएं सामान्य संकेतक है, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इन लक्षणों की सरलता सामान्य आबादी में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है। इन चेतावनी संकेतों के प्रकट होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने से, व्यक्ति मस्तिष्क स्ट्रोक की स्थिति में सकारात्मक परिणाम की संभावना को काफी हद तक बढ़ा सकते है।

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माइग्रेन की समस्या क्या है और इससे संबंधित किस तरह के प्रश्न पूछे जाते है ?

माइग्रेन, एक जटिल न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है, जो उन लोगों के जीवन पर छाया डालती है, जो इसके अप्रत्याशित और कष्टदायी लक्षणों से जूझते है। यह सिर्फ सिरदर्द नहीं है, यह कष्टदायक संवेदनाओं और लक्षणों की एक जटिल पहेली है जो अक्सर व्यक्तियों को दर्द के चक्र में फंसा हुआ महसूस कराती है, तो आइये जानते है माइग्रेन संबंधित समस्त बातें ;

माइग्रेन की समस्या क्या है ?

इसके मूल में, माइग्रेन की विशेषता तीव्र, स्पंदनशील सिरदर्द है, जो आमतौर पर सिर के एक तरफ को प्रभावित करता है, साथ में मतली, प्रकाश और ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता और, कभी-कभी, दृश्य गड़बड़ी भी होती है। हालाँकि, माइग्रेन का अनुभव प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है, जिससे इसे समझना और इलाज करना एक कठिन चुनौती बन जाता है।

माइग्रेन की समस्या गंभीर होने पर आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन का चयन करने में संदेह नहीं करना चाहिए।

लक्षण क्या है माइग्रेन के ?

माइग्रेन के लक्षण को चार चरणों में विभाजित किया गया है, जैसे ; 

प्रोड्रोम : 

यह माइग्रेन से एक या दो दिन पहले शुरू होता है। माइग्रेन के आगमन का संकेत देने वाले परिवर्तनों में गर्दन में अकड़न, कब्ज, मूड में बदलाव, प्यास और पेशाब में वृद्धि और बार-बार उबासी आना शामिल है। अगर आप गर्दन में अकड़न, कब्ज, और मूड में बदलाव जैसी समस्या का सामना कर रहें है तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए। 

आभा : 

ये संवेदी और दृश्य लक्षणों में से एक है जैसे प्रकाश की चमक, लहरदार, टेढ़ी-मेढ़ी दृष्टि। मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और आपको स्पर्श (संवेदी गड़बड़ी) का अनुभव हो सकता है। कभी-कभी मोटर या वाणी संबंधी गड़बड़ी भी मौजूद होती है। लक्षणों में चेहरे पर कमजोरी या सुन्नता, बोलने में कठिनाई, शोर या संगीत सुनना या अनियंत्रित गति शामिल है।

हमला : 

दर्द सिर के एक या दोनों तरफ महसूस होता है। दर्द धड़क रहा है और धड़क रहा है और धुंधली दृष्टि, मतली, उल्टी, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, गंध, स्पर्श, चक्कर आना और बेहोशी से जुड़ा है। यदि उपचार न किया जाए तो माइग्रेन लगभग 4 से 72 घंटों तक रहता है।

पोस्ट-ड्रोम : 

अंतिम चरण जिसमें आप थका हुआ या थका हुआ महसूस कर सकते है। जो लक्षण प्रबल होते है, उनमें भ्रम, कमजोरी, मनोदशा, चक्कर आना और प्रकाश और ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता शामिल है।

माइग्रेन से जुड़े प्रश्न !

ट्रिगर : 

कौन से कारक माइग्रेन प्रकरण को ट्रिगर करते है? क्या ऐसे विशिष्ट खाद्य पदार्थ, तनाव कारक, पर्यावरणीय कारक या हार्मोनल परिवर्तन है जो इसकी शुरुआत में योगदान करते है। 

न्यूरोलॉजिकल आधार : 

माइग्रेन के दौरान मस्तिष्क में क्या होता है? मस्तिष्क रसायन शास्त्र या न्यूरोनल गतिविधि में परिवर्तन लक्षणों की शुरुआत से कैसे संबंधित है।

दैनिक जीवन पर प्रभाव : 

माइग्रेन दैनिक जीवन और कार्यक्षमता को कैसे प्रभावित करता है? यह काम, सामाजिक संपर्क और समग्र कल्याण में क्या चुनौतियाँ पेश करता है। 

उपचार के विकल्प : 

माइग्रेन के लिए वर्तमान उपचार विकल्प क्या उपलब्ध है ? वे कितने प्रभावी है और संभावित दुष्प्रभाव क्या है। 

निवारक उपाय : 

क्या माइग्रेन के हमलों की आवृत्ति और तीव्रता को रोकने या कम करने के कोई तरीके है? माइग्रेन के प्रबंधन में आहार, व्यायाम और तनाव प्रबंधन जैसे जीवनशैली में बदलाव कितने प्रभावी है। 

आनुवंशिकी की भूमिका : 

क्या माइग्रेन का कोई आनुवंशिक घटक है ? क्या कुछ व्यक्तियों को उनकी आनुवंशिक संरचना के कारण माइग्रेन का अनुभव होने की अधिक संभावना है। 

लिंग असमानताएँ : 

माइग्रेन पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक क्यों प्रभावित करता है? माइग्रेन के हमलों को शुरू करने में हार्मोनल उतार-चढ़ाव क्या भूमिका निभाता है। 

वैकल्पिक उपचार : 

कौन से वैकल्पिक उपचार या पूरक दृष्टिकोण, जैसे एक्यूपंक्चर, योग, या हर्बल उपचार, माइग्रेन के लक्षणों को कम करने में वादा दिखाते है। 

अनुसंधान और भविष्य की संभावनाएँ : 

माइग्रेन को बेहतर ढंग से समझने और उसके इलाज के लिए कौन-सा शोध चल रहा है? इस स्थिति के प्रबंधन में भविष्य के उपचार और प्रगति की क्या संभावनाएं है। 

ध्यान रखें !

माइग्रेन की समस्या काफी गंभीर मानी जाती है, क्युकी इसमें व्यक्ति को मानसिक के साथ कई सारी शारीरिक समस्या का सामना भी करना पड़ता है। वहीं माइग्रेन की समस्या से अगर आप बचाव चाहते है, तो इसके लिए आपको न्यूरो लाइफ ब्रेन एन्ड स्पाइन सेंटर का चयन करना चाहिए।

निष्कर्ष :

माइग्रेन की रहस्यमय प्रकृति बहुत सारे सवाल पैदा करती है, जो शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों को परेशान करती रहती है। जैसे-जैसे हम मस्तिष्क के जटिल तंत्र और माइग्रेन को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों की जटिल परस्पर क्रिया में गहराई से उतरते है, प्रभावित लोगों के लिए बेहतर उपचार और जीवन की बेहतर गुणवत्ता की आशा होती है।

माइग्रेन के रहस्यों को जानने की कोशिश में, इसके लक्षणों, ट्रिगर्स, न्यूरोलॉजिकल आधारों और दैनिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना जरूरी हो जाता है। यह केवल एक सिरदर्द नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जो इससे होने वाली पीड़ा को कम करने के लिए ध्यान, सहानुभूति और व्यापक शोध की मांग करती है।

अंतरिम में, व्यक्तियों के जीवन पर माइग्रेन के प्रभाव को प्रबंधित करने और कम करने के प्रयास जारी है, जिससे ऐसे भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो रहा है जहां प्रभावित लोग इस दुर्बल स्थिति से राहत और राहत पा सकते है।

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अनिद्रा से बचाव के क्या है – कारण और लक्षण ?

अनिद्रा एक आम नींद विकार है जो दुनिया भर में लाखों लोगों को अपनी गिरफ्त में करता है। यह दैनिक जीवन को बाधित कर सकता है, जिससे थकान, मनोदशा में बदलाव और जीवन की गुणवत्ता में कमी आ सकती है। इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए, अनिद्रा के कारणों और लक्षणों को समझना और इसे रोकने के तरीके सीखना महत्वपूर्ण है। इस लेख में, हम इसके कारणों और लक्षणों पर ध्यान केंद्रित करते हुए आपके सभी प्रश्नो का उत्तर देंगे और साथ ही रोकथाम पर चर्चा भी करेंगे ;

अनिद्रा के कारण –

तनाव : 

तनाव का उच्च स्तर अनिद्रा का एक प्रमुख कारण हो सकता है। जब आप लगातार चिंतित या परेशान रहते है, तो आपका दिमाग आराम करने के लिए संघर्ष करता है, जिससे सो पाना मुश्किल हो जाता है। अनिद्रा को रोकने के लिए विश्राम तकनीकों या परामर्श के माध्यम से तनाव कम करना आवश्यक है।

खराब नींद की आदतें : 

अनियमित नींद का कार्यक्रम, देर रात तक स्क्रीन पर रहना और सोने से पहले कैफीन या अल्कोहल का सेवन आपके नींद के चक्र को बाधित कर सकता है। अनिद्रा को रोकने के लिए, लगातार सोने की दिनचर्या स्थापित करें और सोने से पहले स्क्रीन एक्सपोज़र को सीमित करें।

चिकित्सीय स्थितियाँ : 

कुछ चिकित्सीय स्थितियाँ, जैसे पुराना दर्द, अस्थमा, या सीने में जलन, के कारण सोना मुश्किल हो सकता है। दवा या जीवनशैली में बदलाव के साथ इन स्थितियों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने से अनिद्रा को रोकने में मदद मिल सकती है।

दवाएँ : 

कुछ दवाएँ, जैसे एलर्जी, अस्थमा या उच्च रक्तचाप के लिए, नींद में बाधा डाल सकती है। यदि आपको संदेह है कि आपकी दवा अनिद्रा का कारण बन रही है, तो विकल्पों के लिए अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श लें।

मानसिक स्वास्थ्य विकार : 

अवसाद और चिंता जैसी स्थितियां अनिद्रा का कारण बन सकती है। अनिद्रा को प्रभावी ढंग से रोकने और इलाज करने के लिए इन स्थितियों में पेशेवर मदद लेना महत्वपूर्ण है। अगर मानसिक कारणों की वजह से आपको नींद नहीं आती तो इसके लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

पर्यावरणीय कारक : 

शोर, रोशनी या असुविधाजनक गद्दा आपकी नींद में खलल डाल सकता है। अनिद्रा को रोकने के लिए शांत और आरामदायक नींद का माहौल बनाना महत्वपूर्ण है।

अनिद्रा के लक्षण –

सोने में कठिनाई का सामना करना : 

अनिद्रा के प्राथमिक लक्षणों में से एक है थके होने पर भी सोने के लिए संघर्ष करना। आप लंबे समय तक बिस्तर पर करवटें बदलते हुए बिता सकते है।

बार-बार जागना : 

अनिद्रा के कारण अक्सर रात में बार-बार जागना पड़ता है, जिससे आरामदायक नींद का आनंद लेना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

दिन के समय थकान : 

अनिद्रा के कारण दिन में थकान और नींद आ सकती है, जो आपकी दैनिक गतिविधियों, काम और जीवन की समग्र गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।

मूड में बदलाव का आना : 

अनिद्रा के कारण मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है। इससे तनाव और चिंता भी बढ़ सकती है।

प्रदर्शन में कमी का आना : 

अनिद्रा आपके संज्ञानात्मक कार्यों को ख़राब कर सकती है, जिससे ध्यान केंद्रित करना, समस्याओं को हल करना या निर्णय लेना मुश्किल हो जाता है। इससे कार्यस्थल पर या दैनिक कार्यों में आपका प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। वहीं कोई भी फैसला करना आपके लिए मुश्किल होते जा रहा है तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन का चयन करना चाहिए।

अनिद्रा से कैसे करें बचाव –

  • लगातार सोने की एक दिनचर्या बनाएं। एक ही समय पर बिस्तर पर जाना और जागना आपके शरीर की आंतरिक घड़ी को नियंत्रित करने में मदद करता है।
  • सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन देखने से बचें। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी आपकी नींद के पैटर्न को बाधित कर सकती है।
  • सोने से पहले कैफीन और शराब से बचें। यदि सोने से पहले आपको भूख लगती है तो हल्का, स्वास्थ्यवर्धक नाश्ता चुनें।
  • सोने से पहले आरामदेह गतिविधियों में शामिल हों, जैसे पढ़ना, गर्म पानी से स्नान करना या ध्यान का अभ्यास करना। ये आपके शरीर को संकेत दे सकते है कि अब आराम करने का समय आ गया है।
  • सुनिश्चित करें कि आपका शयनकक्ष आरामदायक, अंधेरा और शांत हो। यदि आवश्यक हो तो एक अच्छे गद्दे और काले पर्दे में निवेश करें।
  • तनाव से निपटने के लिए स्वस्थ तरीके खोजें, जैसे गहरी साँस लेने के व्यायाम, योग या परामर्शदाता से बात करना।
  • नियमित व्यायाम से नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। सप्ताह के अधिकांश दिनों में कम से कम 30 मिनट की मध्यम शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखें।
  • यदि आप दिन के दौरान झपकी लेते है, तो रात की नींद में हस्तक्षेप से बचने के लिए इसे कम रखें।

अनिद्रा के इलाज के लिए बेस्ट क्लिनिक !

अगर आपकी अनिद्रा की समस्या ज्यादा ही गंभीर होते जा रही है तो इससे बचाव के लिए आपको न्यूरो लाइफ ब्रेन एन्ड स्पाइन सेंटर का चयन करना चाहिए।

निष्कर्ष :

अनिद्रा के कारणों और लक्षणों को पहचानना आपकी नींद पर नियंत्रण रखने की दिशा में पहला कदम है। इन निवारक उपायों को अपने दैनिक जीवन में शामिल करके, आप अपनी नींद की गुणवत्ता और समग्र स्वास्थ्य में सुधार कर सकते है। स्वस्थ, अधिक उत्पादक जीवन के लिए अच्छी रात की नींद को प्राथमिकता देना आवश्यक है।