क्या घर में बिल्ली रखने से बढ़ सकता है, इस मानस‍िक बीमारी का खतरा, जाने डॉक्टर से

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क्या घर में बिल्ली रखने से बढ़ सकता है, इस मानस‍िक बीमारी का खतरा, जाने डॉक्टर से

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आज के समय में, ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिनको घर में बिल्ली पालने का काफी ज्यादा शौक होता है। दरअसल, ऐसा बहुत बार देखने को मिलता है, कि किसी के घर में एक तो किसी के घर में एक से ज्‍यादा बिल्लियां मौजूद होती हैं। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में, पालतू जानवरों के प्रेमिओं के लिए एक हैरान कर देने वाली बात सामने आई है, जिसमें यह कहा गया है, कि बिल्ली को पालने या फिर उसको छूने पर मानस‍िक ड‍िसआर्डर सिजोफ्रेनिया का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है। दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि की गई इस स्टडी के नतीजों को सही तरीके से समझना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। आपको बता दें, कि वैज्ञानिकों द्वारा की गई ये स्टडी दरअसल कारण और परिणाम को नहीं दिखती है, बल्कि यह केवल एक संबंध को दिखाती है। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि क्या वाकई स्टडी में सामने आई बातों के अनुसार, बिल्ली पालने से मानसिक डिसऑर्डर सिजोफ्रेनिया हो सकता है?

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बिल्लियों को पालने से सिज़ोफ्रेनिया हो सकता है: स्टडी

आपको बता दें, कि ऑस्ट्रेलिया में क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में पाया गया कि बिल्ली पालने की वजह से सिज़ोफ्रेनिया जैसी समस्या का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है। आम तौर पर, इस स्टडी में पाया गया है कि जो लोग ज्यादातर इन बिल्लियों को अपने घरों में रखते हैं, और जो लोग ज्यादातर इनके संपर्क में रहते हैं, उनमें सिज़ोफ्रेनिया जैसी समस्या होने का खतरा असल में लगभग दोगुना होता है।

बिल्लियां पालने का मानसिक बीमारी से कोई संबंध नहीं होता है

दरअसल, यह रिसर्च पिछले अध्ययन पर आधारित है, जिसमें मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया और टोक्सोप्लाज्मा गोंडी नाम के एक छोटे पैरासाइट के बीच एक संबंध दिखाया गया था, और यह पैरासाइट बिल्ली के मल में पाया जाता है। पर डॉक्टर से अनुसार, टोक्सोप्लाज्मोसिस पर कई सालों से रिसर्च हो रही है, क्योंकि इसके कारण दिमाग पर हल्के प्रभाव दिखाई दे सकते हैं, जैसे कि न्यूरोट्रांसमीटर और सूजन, पर ज्यादातर जो लोग इस पैरासाइट के संपर्क में आते हैं, दरअसल उन व्यक्तियों में किसी भी तरह का कोई लक्षण या फिर मानसिक समस्या नहीं होती है। डॉक्टर के अनुसार, कभी-कभी यह बीमारी, इन्फेक्शन या फिर इम्यून सिस्टम रिएक्शन के कारण भी हो सकती है। इसलिए, बिल्ली को पालना या फिर कभी-कभी सहलाना चिंता की बात नहीं होनी चाहिए।

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सिजोफ्रेनिया होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं

सिजोफ्रेनिया जैसी समस्या होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। दरअसल, सिजोफ्रेनिया एक मल्टी फैक्टोरियल बीमारी है, यानी कि यह कई तरह के कारणों से मिलकर हो सकती है। आम तौर पर, इसमें बचपन के मुश्किल हालात, तनाव, जेनेटिक कारण और दिमाग में केमिकल्‍स का असंतुलन शामिल हो सकता है। दरअसल, यह सभी कारक मिलकर सिजोफ्रेनिया में योगदान डालते हैं। आपको बता दें, कि न्यूरॉन्स के बीच संबंध टूटने और दिमाग के सर्किट में गड़बड़ी होने की वजह से एक इंसान की सोच, समझ, अनुभव और व्यवहार पर काफी ज्यादा असर पड़ता है।

बिल्ली पाल रहे हैं तो रखें इन बातों का ख्‍याल

आम तौर पर, घर में बिल्ली पालते वक्त कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है, जैसे कि 

  1. बिल्ली का लिटर बॉक्स साफ करने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह धोएं।
  2. दरअसल, इस दौरान केवल जानवरों की साफ-सफाई के आसान तरीके ही काफ़ी होते हैं। जानवरों को पालते वक्त या फिर उनकी देखभाल करते वक्त कमजोर इम्यूनिटी वाले व्यक्तिों को और प्रेग्नेंट महिलाओं को अपना काफी ज्यादा ध्यान रखना चाहिए।
  3. दरअसल, इस तरह की स्थिति में, बिल्लियाँ हम इंसानों को भावनात्मक सहारा प्रदान करती हैं, हमारे अकेलापन, तनाव और चिंता को काफी ज्यादा दूर करती हैं। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में, बिल्ली पालने के फायदे मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए होने वाले जोखिमों से कहीं ज्यादा होते हैं।
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निष्कर्ष: डॉक्टर के अनुसार, बिल्ली घर में रखने से सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारी नहीं होती है, क्योंकि पालतू जानवरों से हमें भावनात्मक सहारा मिलता है। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर अगर आपको दिमाग से जुड़ी कोई समस्या है, जिसका आप इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर इसके विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।