पार्किंसंस के मरीजों के इलाज के लिए कौन से योगासन हो सकते हैं बेहतर? डॉक्टर से जानें इसके बारे में !

Categories
health Hindi

पार्किंसंस के मरीजों के इलाज के लिए कौन से योगासन हो सकते हैं बेहतर? डॉक्टर से जानें इसके बारे में !

Loading

पर्किंसंस असल में दिमाग से जुड़ी एक बीमारी है, जिसकी वजह से डोपामाइन बनाने वाले नर्व सेल्स का विनाश हो जाता है। आम तौर पर, पर्किंसंस जैसी समस्या विशेष तौर पर नर्वस सिस्टम को बुरी तरीके से प्रभावित कर देती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि यह एक इस तरह की बीमारी होती है, जिसकी वजह से पूरे शरीर की गतिविधियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसमें विशेष तौर पर चलने में दिक्क्त और संतुलन न बना पाना शामिल होता है। आम तौर पर, इस तरह की समस्या से पीड़ित लोगों के शरीर का संतुलन काफी ज्यादा बिगड़ जाता है। इस तरह की समस्या में आखिर लोगों के साथ ऐसा क्यों होता है, इसके बारे में अभी तक कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है। दरअसल, इस तरह की स्थिति में एक व्यक्ति के सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर काफी ज्यादा बुरा असर पड़ता है। अब ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है, आखिर इस तरह की समस्या को किस तरीके से कंट्रोल में किया जा सकता है? असल में, आप कुछ योगासन के नियमित अभ्यास के माध्यम से पर्किंसंस जैसी बीमारी को नियंत्रण में रख सकते हैं, जिसमें ताड़ासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन जैसे कुछ योग शामिल हो सकते हैं। दरअसल, इनका रोजाना अभ्यास करने से न केवल पार्किंसंस डिजीज को बढ़ने से रोका जा सकता है, बल्कि इन से शरीर पर काफी हद तक संतुलन बनाकर भी रखा जा सकता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

पार्किंसंस रोग के लक्षण 

आम तौर पर, पार्किंसंस बीमारी लोगों में एक आम समस्या बन गई है। हालांकि, इस समस्या के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। इसके लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. इस समस्या से प्रभावित लोगों के हाथ पैर कांपना। 
  2. गतिविधियों का धीमा होना। 
  3. मांसपेशियां का काफी ज्यादा सख्त हो जाना। 
  4. शरीर का अजीब सा पोस्चर होना। 
  5. संतुलन न बना पाना। 
  6. बोलचाल में काफी बदलाव हो जाना। 
  7. हाथ की लिखावट में काफी बदलाव हो जाना।

क्या योग से पार्किंसंस का इलाज संभव हो सकता है?

असल में, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि अगर पार्किंसंस जैसी समस्या की शुरुआत में ही आपको इसके लक्षण नज़र आने लगे, तो हाँ इस बीमारी को कुछ योगासन के माध्यम से भी कंट्रोल में किया जा सकता है। दरअसल, इस बात को तो लगभग सभी जानते ही होंगे, कि योग की अलग-अलग क्रियाओं को करने पर नसें और मांसपेशियां काफी ज्यादा मजबूत बनती हैं। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति के दौरान किसी भी तरह का कोई भी आसन या फिर एक्सरसाइज़ करने पर आपको काफी ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। इस तरह की समस्या से राहत पाने के लिए आप खुली हवा में कम से कम दो से तीन किलोमीटर चलें। इसके लिए स्विमिंग भी काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है। इस बीमारी को कंट्रोल में रखने के लिए आप ताड़ासन, पवनमुक्तासन और उत्तानपादासन, इन तीन योगआसन के इलावा नुरासन, भुजंगासन, नौकासन, गोमुखासन, शवासन, योगनिद्रा का भी अभयास कर सकते हैं। इनसे पार्किंसंस रोक के लक्षणों को कम किया जा सकता है। 

पार्किंसंस बीमारी के मरीजों को अपने डेली रूटीन में ये योगासन ज़रूर शामिल करने चाहिए।

  1. ताड़ासन 

आम तौर पर, पार्किंसंस जैसी बीमारी से पीड़ित लोगों को ताड़ासन करने से काफी ज्यादा फायदा मिल सकता है। दरअसल, इसके नियमित अभ्यास से पार्किंसंस के लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल में किया जा सकता है। ताड़ासन का अभ्यास करने के लिए आप सबसे पहले बिलकुल सीधे खड़े हो जाएँ, जिसमें आपकी दोनों पैर की एड़ियां एक- दूसरे के साथ टच करें। इसके बाद फिर अपने दोनों हाथों की हथेलियों को एक साथ जोड़ लें और फिर इसके बाद अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर की तरफ सीधा करें और अपने पंजों के बल पर खड़े हो जाएं। इसके बाद अब अपने दोनों हाथो को आराम से खोलें और की तरह लेकर आएं। इस आसान को करते वक्त जितना हो सके अपने शरीर को काफी ज्यादा स्ट्रेच करने की कोशिश करें। इस आसान से न केवल आपके पेट की मसल्स फिट रहती हैं, बल्कि उस को इससे सही शेप भी प्राप्त होती है। इसके इलावा, इससे घुटनों और टखनों की कैपेसिटी भी काफी ज्यादा बढ़ जाती है। 

2 पवनमुक्तासन

दरअसल, पवनमुक्तासन न केवल पार्किंसंस को कंट्रोल में रखने में मदद करता है, बल्कि यह गैस, कब्ज और बवासीर जैसी समस्या से परेशान व्यक्तियों के लिए भी काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। आम तौर पर, इस का अभ्यास करने के लिए आप पीठ के बल बिलकुल सीधे होकर लेट जाएं और आराम -आराम से सांस लें। इसके बाद, अपने पैरों को आराम से एक साथ उठायें और पैर के घुटनों को मोड़ लें। अब अपने पैरों के घुटनों को छाती की तरफ लाएं और मुँह से टच करें। इसके बाद पैरों को हाथों की उंगलियों के साथ पूरी तरीके से जकड़ लें। इस दौरान, आपकी जांघ आपके पेट के साथ और पैर के घुटने आपकी नाक के साथ टच होने चाहिए। दरअसल, कम से कम इस स्थिति में 20 से 30 सेकंड तक ऐसे ही रहें और धीरे- धीरे आम स्थिति में वापिस आ जाएँ। इस आसन को दिन में कम से कम 5 से 10 बार करने पर आपको काफी ज्यादा लाभ प्राप्त हो सकता है। इससे पार्किंसंस को काफी कंट्रोल में रखा जा सकता है। 

निष्कर्ष: पार्किंसंस बीमारी एक आम समस्या है, जो ज्यादातर अधिक उम्र के लोगों को प्रभावित करती है। यह एक दिमाग से जुड़ी बीमारी है, जिसमें एक व्यक्ति के सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है, जिसको ताड़ासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन जैसे योगआसन से कंट्रोल किया जा सकता है। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर जाकर इसके विशेषज्ञों से सम्पर्क कर सकते हैं।

Categories
health Hindi

पार्किन्संस बीमारी से लड़ने के लिए किन 2 बातों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है? डॉक्टर से जानें इसके बारे में !

Loading

अब तक तो सभी इसके बारे में जान ही गए होंगे, कि पार्किन्संस जैसी बीमारी एक इस तरह की समस्या है, जो एक व्यक्ति के शरीर को काफी ज्यादा कमजोर कर देती है। इस समस्या के दौरान एक व्यक्ति की जीवन शैली पूरी तरीके से प्रभावित हो जाती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि इस बीमारी के बहुत से कारण हो सकते हैं, जिस में डॉक्टर के अनुसार जेनेटिक कारण और पर्यावरण के कारण भी शामिल हो सकते हैं। आम तौर पर, पार्किंसंस बीमारी आज के युवाओं और बुजुर्गों पर एक समान रूप से असर डालती है। आपको बता दें, कि अगर इस समस्या को भारत के नजरिये से देखा जाये, तो इसके प्रति लोगों में जानकारी की काफी ज्यादा कमी है। हालांकि, अगर पार्किंसंस बीमारी को इसके शुरुआती लक्षणों से पहचान लिया जाये, तो इस की वजह से शरीर में होने वाली गंभीर परेशानियों से अपना बचाव किया जा सकता है। दरअसल, समस्या का समय पर इलाज न किये जाने पर, यह सेहत के लिए और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। इसलिए, वक्त रहते समस्या की पहचान और इलाज दोनों ही बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं। 

पार्किंसंस जैसी बीमारी के लक्षणों में शरीर के अंगों में कंपकंपी महसूस होना, शरीर में एक अलग सी ही जकड़न का महसूस होना, हर वक्त सुस्ती होना, चलने फिरने में काफी ज्यादा दिक्कत महसूस होना और साथ में शरीर का संतुलन बनाने में काफी परेशानी का सामना करना शामिल हो सकता है। इसके अलावा, जब पार्किन्संस जैसी समस्या एक व्यक्ति में काफी ज्यादा बढ़ने लग जाती है, तो इस दौरान व्यक्ति ज्यादातर तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्या की भी शिकायत करने लग जाता है। आम तौर पर, इसके साथ ही इसकी कुछ स्थितियों में, जो लोग पार्किन्संस जैसी समस्या से जूझ रहे होते हैं, दरअसल वह इसके साथ- साथ डिमेंशिया जैसी समस्या का भी शिकार हो जाते हैं। हालांकि, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि अगर इस समस्या के दौरान आपको इस तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से या फिर किसी अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए। इस के साथ ही, शारीरिक गतिविधियों से जुड़े किसी भी तरह के विकारों से अपना बचाव करने के लिए आप अपनी जीवन शैली में कुछ विशेष उपाओं को अपना सकते हैं। ऐसे में, बहुत से लोग जानना चाहते हैं, कि पार्किन्संस बीमारी से लड़ने के लिए किन उपायों को अपनाया जा सकता है? दरअसल, इस तरह की समस्या से लड़ने के लिए आप समय पर सोना, रोजाना अपना नाश्ता करना न भूलना, नियमित कसरत और वर्कआउट करना और डाइट में विटामिन और मिनरल्स को शामिल करना जैसे कुछ उपाय को आप अपनी जीवन शैली में शामिल कर सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

पार्किन्संस बीमारी से लड़ने के लिए इन 2 बातों का ध्यान रखना चाहिए। 

दरअसल, पार्किन्संस जैसी समस्या से लड़ने के लिए आप निम्नलिखत 2 बातों का ध्यान रख सकते हैं, जैसे कि 

  1. समय पर सोना 

यह सभी जानते हैं, कि एक व्यक्ति को बेहतर सेहत प्राप्त करने के लिए एक अच्छी नींद लेना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि जो लोग रोजाना एक अच्छी नींद प्राप्त नहीं करते हैं, उनके नर्व सिस्टम में परेशानी हो सकती है। आम तौर पर, एक अच्छी नींद प्राप्त करने के लिए इस दौरान शांति और अंधेरा बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, अगर आप रोजाना एक अच्छी नींद लेते हैं, तो इससे पार्किन्संस जैसी समस्या से बचा जा सकता है। 

  1. नाश्ता करना न भूलना 

अक्सर देखा जाता है, कि लोग जल्दबाजी में अपना नाश्ता करना भूल जाते हैं, जो सेहत के लिए कहीं न कहीं नुकसानदायक साबित हो सकता है। दरअसल, अगर आप उन लोगों में से हैं, जो अपनी डेली लाइफ में नाश्ता करना बिल्कुल भी नहीं भूलते हैं, तो आप इस दौरान सेहत से जुड़ी कई तरह की समस्याओं से अपना बचाव कर सकते हैं। आम तौर पर, पार्किंसंस जैसी बीमारी से बचने के लिए आप अपनी डाइट में सेहतमंद चीजों को शामिल कर सकते हैं और साथ में इस के लिए अपने सुबह के नाश्ते को समय पर करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान आप अपने सुबह के नाश्ते में पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और प्रोटीन की ज्यादा मात्रा वाले खाद्य पदार्थों को शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा, आप अपनी सुबह की डाइट में अंकुरित अनाज, दूध और साथ में कुछ ड्राई फ्रूट्स को भी शामिल कर सकते हैं। इस से आपकी सेहत को काफी ज्यादा फायदा मिलने के साथ- साथ पार्किंसंस रोग से बचने में भी काफी ज्यादा मदद मिल सकती है। 

निष्कर्ष: पार्किंसंस बीमारी एक आम समस्या है, जो एक व्यक्ति के दिमाग से जुड़ी हुई होती है। यह समस्या आज के युवाओं और बुजुर्ग दोनों को ही एक समान रूप से प्रभावित कर सकती है। पार्किंसंस बीमारी से लड़ने के लिए समय पर सोना, रोजाना अपना नाश्ता करना न भूलना, नियमित कसरत और वर्कआउट करना और डाइट में विटामिन और मिनरल्स को शामिल करना जैसी कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा जा सकता है। इसके अलावा, इस समस्या की शुरुआत में ही कुछ लक्षणों का पता चलने पर शरीर में होने वाली गंभीर परेशानियों से अपना बचाव किया जा सकता है। पार्किंसंस रोग गंभीर होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और पार्किंसंस जैसी दिमाग से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर इसके विशेषज्ञों से जानकारी ले सकते हैं।

Categories
Hindi

क्या इन 4 संकेतों से पार्किंसंस बीमारी की पहचान की जा सकती है? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

Loading

दरअसल, पार्किंसंस रोग एक गतिविधि और मनोदशा संबंधी विकार है, जो एक व्यक्ति की गतिविधि और मानसिक स्थिति को बुरी तरीके से प्रभावित कर देता है। आम तौर पर, यह रोग ज्यादातर 60 उम्र से भी अधिक उम्र के लोगों को काफी ज्यादा प्रभावित करता है। पुरुषों में इस तरह की समस्या होना काफी ज्यादा आम होता है। यह बीमारी दिमाग से जुड़ी हुई होती है, जो एक व्यक्ति की पूरी सेहत को काफी ज्यादा प्रभावित कर देती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि यह बीमारी एक इस तरह की होती है, जो वक्त के साथ एक व्यक्ति में बढ़ती रहती है। इस तरह की स्थिति के दौरान एक व्यक्ति के दिमाग की तंत्रिका कोशिकाओं में डोपामाइन नाम का हार्मोन दिमाग में पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाता है, जिसकी वजह से इस तरह की समस्या का निर्माण होता है। आम तौर पर, डोपामाइन एक केमिकल कि तरह होता है, जो हमारे दिमाग में प्राकृतिक रूप से बनता है और हमारी मसल्स और शरीर की किसी भी तरह की एक्टिविटी को कंट्रोल करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

दरअसल, इसके बारे में, आपको पहले ही बताया है, कि पार्किंसंस रोग के ज्यादातर मामले लगभग 60 से 65 साल की उम्र में सामने आते हैं, पर कम उम्र के लोगों को भी इस तरह की समस्या प्रभावित कर सकती है। इस तरह की समस्या को नज़रअंदाज करने की बजाए, समस्या का समय पर इलाज करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा, जो भी व्यक्ति पार्किंसंस रोग जैसी समस्या से पीड़ित होता है, दरअसल उस व्यक्ति को अपनी समस्या के संकेतों पर ध्यान देकर इसका इलाज करना बेहद जरूरी होता है। ताकि, आगे चलकर किसी बड़ी समस्या का सामना न करना पड़े और इस तरह की समस्या में जल्द सुधार किया जा सके। दरअसल, हाथ-पैरों में कंपकंपी छूटना, मांसपेशियों में अकड़न होना, शारीरिक गति का काफी ज्यादा धीमा हो जाना और शरीर के आकार में बदलाव होना जैसे कुछ संकेतों से पार्किंसंस बीमारी की पहचान की जा सकती है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

शरीर में दिखने वाले इन संकेतों से पार्किंसंस रोग की पहचान की जा सकती है!

  1. हाथ-पैरों में कंपकंपी छूटना 

पार्किंसंस रोग से पीड़ित व्यक्ति को हाथ और पैरों में कपकपी छूटना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। दरअसल, इस तरह की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति शरीर में होने वाली कपकपी को बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं कर पाता है। आम तौर पर, अगर आपको भी अपने शरीर में इस तरह के बदलाव महसूस हो रहे हैं, या फिर आपके आस पास ऐसा कोई व्यक्ति है, जो इस तरह की समस्या से पीड़ित है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ताकि इस समस्या का इलाज वक्त पर किया जा सके।

  1. मांसपेशियों में अकड़न होना 

दरअसल, पार्किंसंस रोग से जूझ रहे लोगों को अपनी मांसपेशियों में काफी ज्यादा अकड़न महसूस हो सकती है। इस समस्या के कारण एक व्यक्ति की जीवन शैली काफी ज्यादा प्रभावित हो जाती है, क्योंकि यह समस्या व्यक्ति की शारीरिक गतिविधियों पर बुरा प्रभाव डालने में किसी भी तरह की कोई भी कमी नहीं छोड़ती है। आम तौर पर, शरीर में इस तरह के लक्षण नज़र आते ही आपको तुरंत अपने डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए। दरअसल, अगर पीड़ित व्यक्ति का वक्त रहते इलाज हो जाये, तो पीड़ित व्यक्ति की स्थिति में काफी हद तक सुधार देखा जा सकता है। 

  1. शरीर के आकार में बदलाव होना 

आम तौर पर, शरीर के आकार मतलब कि पोश्चर में किसी भी तरह का कोई भी बदलाव होना पार्किंसंस रोग का ही संकेत हो सकता है। दरअसल, अगर आपको अपने शरीर में इस तरह का कोई भी लक्षण दिखाई देता है, तो आपको उसे नज़रअंदाज तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए, बल्कि आपको तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से इसका इलाज करवाना चाहिए। 

शरीर में नज़र आना वाले कुछ अन्य संकेत क्या हो सकते हैं? 

दरअसल, शरीर में दिखने वाले अन्य लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. शरीर में काफी ज्यादा थकान महसूस होना। 
  2. हल्के तनाव का अनुभव होना। 
  3. बेचैनी महसूस होना। 
  4. मांसपेशियों में काफी ज्यादा दर्द होना। 
  5. शरीर में संतुलन की समस्या होना। 
  6. आवाज का धीमा हो जाना। 
  7. किसी भी चीज को लिखने में परेशानी होना। 
  8. पढ़ने में काफी ज्यादा परेशानी महसूस होना। 

निष्कर्ष: पार्किंसंस रोग दिमाग जुड़ी बीमारी है, जो व्यक्ति की गतिविधि और मानसिक स्थिति को बुरी तरीके से प्रभावित कर देती है। इस समस्या के लक्षणों पर वक्त रहते ध्यान और सही समय पर इलाज करवाना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। हाथ-पैरों में कंपकंपी छूटना, मांसपेशियों में अकड़न होना, शारीरिक गति का काफी ज्यादा धीमा हो जाना और शरीर के आकार में बदलाव होना जैसे शरीर में दिखने वाले इन संकेतों से पार्किंसंस रोग का पता किया जा सकता है। समस्या को आम समझ कर नज़रअंदाज करने की बजाए, तुरंत इलाज मिलना महत्वपूर्ण होता है। अगर आपको भी अपने शरीर में इस तरह के लक्षण महसूस होते हैं, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर समस्या का इलाज स्थिति में काफी ज्यादा सुधार कर सकता है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और पार्किंसंस रोग जैसी दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Categories
Hindi

क्या आम इंसान को अचानक से पड़ सकता है मिर्गी का दौरा? डॉक्टर से जानें इसके कारण और लक्षणों के बारे में!

Loading

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि मिर्गी हमारे दिमाग से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसमें एक पीड़ित व्यक्ति को बार -बार दौरे पड़ते हैं। मिर्गी को दुनिया भर में एक चौथा और सबसे आम न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर माना जाता है। इसके मुख्य कारणों में स्ट्रोक और कुछ विशेष संक्रमण शामिल हो सकते हैं, जिसका समय पर इलाज होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि न केवल भारत में 12 मिलियन मिर्गी के मरीज पाए जाते हैं, बल्कि इनमें से 30 से 40 प्रतिशत मरीज इस तरह के होते हैं, जिनके पास इसका इलाज करवाने का सर्जरी ही एकमात्र विकल्प होता है। इसके अलावा, केवल भारत में हर साल 500 सर्जरी अकेले मिर्गी के मरीजों की ही की जाती हैं। असल में, ज्यादातर मिर्गी के मरीजों का इलाज दवाइयों से ही किया जाता है, जिससे मिर्गी के दौरे पड़ना काफी ज्यादा कम हो जाता है। ऐसे में, कई लोगों के मन में, यह सवाल जरूर आता है, कि क्या एक आम इंसान को भी अचानक से मिर्गी का दौरा पड़ सकता है? तो इस सवाल का जवाब यही है, कि हाँ एक आम इंसान को भी अचानक से मिर्गी का दौरा पड़ सकता है। दरअसल, यह मिर्गी के दौरे तब पड़ते हैं, जब एक व्यक्ति के दिमाग में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी अचानक से काबू से बाहर हो जाती है। जिसका समाधान करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी लेते हैं। 

मिर्गी के लक्षण क्या हो सकते हैं?

आम तौर पर, ज्यादातर मिर्गी के लक्षण इस बात पर ही निर्भर करते हैं, कि पीड़ित व्यक्ति के दिमाग का कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। मिर्गी जैसी समस्या के लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. मिर्गी जैसी समस्या के दौरान दौरा पड़ने पर पूरी तरीके से होश खो बैठना। 
  2. इस दौरान, कुछ लोगों को सुनने और देखने में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 
  3. मिर्गी का दौरा पड़ने पर पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में काफी ज्यादा दिक्क्त महसूस हो सकती है। 
  4. मिर्गी जैसी समस्या के दौरान पीड़ित व्यक्ति किसी भी जगह को टिकटिकी लगाकर घूर सकता है। 
  5. इस दौरान पीड़ित व्यक्ति होंठ चटकाना और हाथ रगड़ने जैसा असामान्य व्यवहार भी कर सकता है। 
  6. दौरा पड़ने के दौरान पीड़ित व्यक्ति का दिल तेजी से या फिर धीमी गति से धड़क सकता है। 
  7. दौरे के दौरान पीड़ित व्यक्ति की आँखें ऊपर की तरह उठ सकती हैं। 
  8. इस तरह की स्थिति उत्पन्न होने पर कुछ लोगों की जीभ भी कट सकती है।

मिर्गी के कारण क्या होते हैं?

दरअसल, डॉक्टर के अनुसार लगभग 50 प्रतिशत मामलों में मिर्गी जैसी समस्या का किसी भी तरह का कोई भी स्पष्ट कारण नहीं मिलता है। पर इसके कारणों में कुछ निम्नलिखित कारक शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. सिर पर गहरी चोट लगना: दरअसल, जिन लोगों को किसी दुर्घटना के दौरान या फिर दीवार पर सिर लगने पर सिर पर चोट लग जाती है, तो उन लोगों में मिर्गी का दौरा पड़ने का जोखिम काफी ज्यादा होता है। 
  2. जेनेटिक होना: आम तौर पर, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि मिर्गी जैसी समस्या में दौरे पड़ना जेनेटिक भी हो सकता है। यानी कि अगर परिवार में इस तरह की समस्या का इतिहास बना हुआ है, जैसे कि यह समस्या पहले से ही मम्मी-पापा या फिर दादा-दादी को हुई है, तो आप में भी इस तरह की समस्या का जोखिम हो सकता है। 
  3. दिमाग से जुड़ी कुछ समस्याओं का होना: दरअसल, इस दौरान दिमाग से जुड़ी कुछ समस्याएं, जैसे कि दिमाग का ट्यूमर और स्ट्रोक होने की वजह से भी मिर्गी के दौरे पड़ना जैसी समस्या हो सकती है। 
  4. संक्रमण होना: इस तरह की स्थिति में एचआईवी और वायरल एन्सेफेलाइटिस जैसे संक्रमणों की वजह से भी एक व्यक्ति को मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं। इसके अलावा, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर के कारण भी मिर्गी के दौरे पड़ने जैसी समस्या हो सकती है। 

निष्कर्ष: दरअसल, मिर्गी की समस्या एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो हमारे दिमाग से जुड़ी होती है। इस दौरान, न केवल पीड़ित व्यक्ति को दौरे पड़ते हैं, बल्कि वह अपने होश को भी खो बैठता है। हाँ यह बात बिल्कुल सच है, कि एक आम इंसान को भी अचानक से मिर्गी का दौरा पड़ सकता है। मिर्गी का दौरा तब पड़ता है, जब हमारे दिमाग में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी अचानक से काबू से बहार हो जाती है। यह समस्या कई कारणों से हो सकती है, जिस में सिर में गहरी चोट लगना, पारिवारिक इतिहास होना और दिमाग से जुड़ी कुछ समस्याओं का होना शामिल हो सकता है। इस समस्या के दौरान आपको कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जिन का समय पर इलाज होना अत्यंत जरूरी होता है। मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति की अच्छे से देखभाल करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसकी गंभीर स्थिति उत्पन्न होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी तरह की गंभीर समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Categories
Hindi

पेट का माइग्रेन क्या होता है? डॉक्टर से जाने इसके कारण, लक्षण और उपचार के विकल्पों के बारे में

Loading

आज के समय में, ऐसी कई समस्याएं हैं, जो सिर्फ बड़ो को ही नहीं, बल्कि बच्चों को भी प्रभावित करती हैं, जैसे कि पेट का माइग्रेन। आम तौर पर, पेट का माइग्रेन एक तरीके का माइग्रेन होता है, जो विशेष रूप से छोटे बच्चों पर बुरा असर डालता है। पर, ऐसा भी नहीं है, कि यह सिर्फ बच्चों को ही प्रभावित करता है, दरअसल यह समस्या बड़ों में भी हो सकती है। दरअसल, इस तरह की समस्या में, एक बार नहीं, बल्कि बार बार पेट में दर्द की समस्या उत्पन्न होती है, जिसकी वजह से अक्सर मतली और उल्टी जैसी समस्या का एहसास होता है। हालांकि, पेट का माइग्रेन, दूसरे माइग्रेन की तरह व्यापक रूप से पहचाना नहीं जाता है, पर इस से छुटकारा पाने और इसका इलाज करने के लिए इसके बारे में, जानकारी प्राप्त करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। 

ऐसे में, कई लोगों के मन में सवाल आता है, कि आखिर पेट का माइग्रेन होता क्या है और इसके कारण, लक्षण और उपचार के विकल्प क्या हो सकते हैं? तो दरअसल, पेट का माइग्रेन एक बार-बार होने वाली स्थिति है, जिसमें एक व्यक्ति के पेट में तेज दर्द जैसी समस्या उत्पन्न होती है, जो अक्सर नाभि के आसपास विकसित होती है। दरअसल, इस तरह की स्थिति में, दर्द एक घंटे से लेकर कई दिनों तक बना रह सकता है और यह अक्सर मतली, उल्टी, भूख न लगना, पीलापन और थकान जैसे लक्षणों के साथ उत्पन्न हो सकता है। इसके कारणों में, संक्रामक, पर्यावरणीय और आनुवंशिक या फिर स्वप्रतिरक्षित कारण शामिल हो सकते हैं, जिसका इलाज दर्द निवारक दवाओं, जीवनशैली में बदलाव और आहार में बदलाव करके किया जा सकता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

पेट के माइग्रेन के क्या कारण हो सकते हैं? 

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि पेट के माइग्रेन का सटीक कारण पूरी तरीके से समझा नहीं गया है। पर, इस तरह की स्थिति में कुछ संक्रामक कारक और पर्यावरणीय कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। जैसे कि इसमें शामिल हो सकते हैं:

  1. संक्रामक कारण 
  2. पर्यावरणीय कारण
  3. आनुवंशिक या फिर स्वप्रतिरक्षित कारण

पेट के माइग्रेन के क्या लक्षण हो सकते हैं?

दरअसल, आम माइग्रेन के उल्ट, पेट के माइग्रेन में सिर दर्द जैसे लक्षण नहीं होते हैं, जिसकी वजह से इन की पहचान करना काफी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हर व्यक्ति में पेट के माइग्रेन के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, जिसमें निम्नलिखित लक्षण शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. पेट में तेज दर्द होना। 
  2. मतली और उल्टी की समस्या होना। 
  3. पीड़ित व्यक्ति को भूख न लगना। 
  4. चेहरे का पीला पड़ जाना। 
  5. व्यक्ति का अक्सर थका हुआ महसूस करना। 

पेट के माइग्रेन के उपचार के विकल्प क्या हो सकते हैं? 

पेट के माइग्रेन के इलाज में दवाओं और साथ में जीवनशैली में बदलाव का संयोजन शामिल होता है। दरअसल, पेट के माइग्रेन के उपचार विकल्पों में निम्नलिखित विकल्प शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

चिकित्सा उपचार में शामिल हो सकते हैं:

  1. दर्द कम करने वाली दवाएं।
  2. मतली और उल्टी को कंट्रोल करने की दवाएं।
  3. रोकथाम की दवाएं।

गैर-औषधीय उपचार में शामिल हो सकते हैं:

  1. आहार में बदलाव।
  2. जीवनशैली में बदलाव।
  3. वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियाँ। 

निष्कर्ष: दरअसल, पेट का माइग्रेन एक बार-बार होने वाली समस्या है, जिसमें एक व्यक्ति के पेट में तेज दर्द जैसी समस्या उत्पन्न होती है, जो अक्सर नाभि के आसपास विकसित होती है। इस तरह की समस्या में, एक बार नहीं, बल्कि बार बार पेट में दर्द की समस्या उत्पन्न होती है, जिसकी वजह से अक्सर मतली, उल्टी, भूख न लगना, चेहरे का पीला पड़ जाना जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। संक्रामक, पर्यावरणीय और आनुवंशिक आदि इसके कारण होते हैं, जिनका उपचार दर्द निवारक दवाओं और जीवनशैली में बदलाव करके किया जा सकता है। अगर आपको भी पेट का माइग्रेन जैसी कोई समस्या है और आप इसका इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न 1. पेट के माइग्रेन के मुख्य लक्षण क्या हो सकते हैं? 

दरअसल, इस तरह की स्थिति में, पेट के माइग्रेन के मुख्य लक्षणों में, पेट में तेज दर्द होना, मतली होना, उल्टी होना, और साथ में भूख न लगना शामिल हो सकता है। पेट का माइग्रेन, मतलब की इसमें, दर्द ऐंठन वाला होता है और यह समस्या अक्सर नाभि के आसपास हो सकती है। 

प्रश्न 2. क्या बड़ों में भी पेट का माइग्रेन जैसी समस्या देखने को मिल सकती है?

हाँ बिलकुल, पेट के माइग्रेन जैसी समस्या बड़ो में भी देखने को मिल सकती है। हालाँकि, पेट का माइग्रेन सबसे ज्यादा बच्चों में देखने को मिल सकता है, पर यह बड़ो में भी हो सकता है। विशेष कर उन लोगों में, जिनको पहले से ही पेट के माइग्रेन जैसी समस्या हो चुकी होती है। 

प्रश्न 3. क्या पेट के माइग्रेन की वजह से कोई जटिलता हो सकती है? 

जी हां, समय पर इलाज न मिलने वाले पेट के माइग्रेनन की वजह से आपको लगातार, गंभीर दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, पोषण में कमी और चिंता जैसी मनोवैज्ञानिक जटिलताएं हो सकती हैं।

Categories
Hindi

क्या घर में बिल्ली रखने से बढ़ सकता है, इस मानस‍िक बीमारी का खतरा, जाने डॉक्टर से

Loading

आज के समय में, ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिनको घर में बिल्ली पालने का काफी ज्यादा शौक होता है। दरअसल, ऐसा बहुत बार देखने को मिलता है, कि किसी के घर में एक तो किसी के घर में एक से ज्‍यादा बिल्लियां मौजूद होती हैं। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में, पालतू जानवरों के प्रेमिओं के लिए एक हैरान कर देने वाली बात सामने आई है, जिसमें यह कहा गया है, कि बिल्ली को पालने या फिर उसको छूने पर मानस‍िक ड‍िसआर्डर सिजोफ्रेनिया का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है। दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि की गई इस स्टडी के नतीजों को सही तरीके से समझना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। आपको बता दें, कि वैज्ञानिकों द्वारा की गई ये स्टडी दरअसल कारण और परिणाम को नहीं दिखती है, बल्कि यह केवल एक संबंध को दिखाती है। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि क्या वाकई स्टडी में सामने आई बातों के अनुसार, बिल्ली पालने से मानसिक डिसऑर्डर सिजोफ्रेनिया हो सकता है?

बिल्लियों को पालने से सिज़ोफ्रेनिया हो सकता है: स्टडी

आपको बता दें, कि ऑस्ट्रेलिया में क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में पाया गया कि बिल्ली पालने की वजह से सिज़ोफ्रेनिया जैसी समस्या का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है। आम तौर पर, इस स्टडी में पाया गया है कि जो लोग ज्यादातर इन बिल्लियों को अपने घरों में रखते हैं, और जो लोग ज्यादातर इनके संपर्क में रहते हैं, उनमें सिज़ोफ्रेनिया जैसी समस्या होने का खतरा असल में लगभग दोगुना होता है।

बिल्लियां पालने का मानसिक बीमारी से कोई संबंध नहीं होता है

दरअसल, यह रिसर्च पिछले अध्ययन पर आधारित है, जिसमें मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया और टोक्सोप्लाज्मा गोंडी नाम के एक छोटे पैरासाइट के बीच एक संबंध दिखाया गया था, और यह पैरासाइट बिल्ली के मल में पाया जाता है। पर डॉक्टर से अनुसार, टोक्सोप्लाज्मोसिस पर कई सालों से रिसर्च हो रही है, क्योंकि इसके कारण दिमाग पर हल्के प्रभाव दिखाई दे सकते हैं, जैसे कि न्यूरोट्रांसमीटर और सूजन, पर ज्यादातर जो लोग इस पैरासाइट के संपर्क में आते हैं, दरअसल उन व्यक्तियों में किसी भी तरह का कोई लक्षण या फिर मानसिक समस्या नहीं होती है। डॉक्टर के अनुसार, कभी-कभी यह बीमारी, इन्फेक्शन या फिर इम्यून सिस्टम रिएक्शन के कारण भी हो सकती है। इसलिए, बिल्ली को पालना या फिर कभी-कभी सहलाना चिंता की बात नहीं होनी चाहिए।

सिजोफ्रेनिया होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं

सिजोफ्रेनिया जैसी समस्या होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। दरअसल, सिजोफ्रेनिया एक मल्टी फैक्टोरियल बीमारी है, यानी कि यह कई तरह के कारणों से मिलकर हो सकती है। आम तौर पर, इसमें बचपन के मुश्किल हालात, तनाव, जेनेटिक कारण और दिमाग में केमिकल्‍स का असंतुलन शामिल हो सकता है। दरअसल, यह सभी कारक मिलकर सिजोफ्रेनिया में योगदान डालते हैं। आपको बता दें, कि न्यूरॉन्स के बीच संबंध टूटने और दिमाग के सर्किट में गड़बड़ी होने की वजह से एक इंसान की सोच, समझ, अनुभव और व्यवहार पर काफी ज्यादा असर पड़ता है।

बिल्ली पाल रहे हैं तो रखें इन बातों का ख्‍याल

आम तौर पर, घर में बिल्ली पालते वक्त कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है, जैसे कि 

  1. बिल्ली का लिटर बॉक्स साफ करने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह धोएं।
  2. दरअसल, इस दौरान केवल जानवरों की साफ-सफाई के आसान तरीके ही काफ़ी होते हैं। जानवरों को पालते वक्त या फिर उनकी देखभाल करते वक्त कमजोर इम्यूनिटी वाले व्यक्तिों को और प्रेग्नेंट महिलाओं को अपना काफी ज्यादा ध्यान रखना चाहिए।
  3. दरअसल, इस तरह की स्थिति में, बिल्लियाँ हम इंसानों को भावनात्मक सहारा प्रदान करती हैं, हमारे अकेलापन, तनाव और चिंता को काफी ज्यादा दूर करती हैं। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में, बिल्ली पालने के फायदे मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए होने वाले जोखिमों से कहीं ज्यादा होते हैं।

निष्कर्ष: डॉक्टर के अनुसार, बिल्ली घर में रखने से सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारी नहीं होती है, क्योंकि पालतू जानवरों से हमें भावनात्मक सहारा मिलता है। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर अगर आपको दिमाग से जुड़ी कोई समस्या है, जिसका आप इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर इसके विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Categories
Alzheimer Dementia problem health Hindi

सुबह खाली पेट करें 1 चम्मच शहद का सेवन, दिमाग के लिए होता है काफी ज्यादा फायदेमंद, डॉक्टर से जानें इसका कारण

Loading

वैसे तो, शरीर के सभी अंग बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं, पर अगर सभी से यह पूछा जाए, कि हमारे शरीर का सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हिस्सा कौन सा है, तो इस तरह की स्थिति में लगभग सभी का जवाब एक ही होगा, और वह है दिमाग। आपको बता दें, कि दिमाग हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमारे शरीर का संचालन करता है, दरअसल, इसके इशारे पर हमारे शरीर का हर एक फंक्शन काम करता है। आम तौर पर, दिमाग हमारे शरीर में सबसे ज्यादा काम करता है, इलसिए इस दौरान हमारा शरीर जो भी ऊर्जा का उत्पादन करता है, दरअसल उस ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा हमारा दिमाग इस्तेमाल करता है। दरअसल, इसी तरह हमारे शरीर में, दिमाग को ऑक्सीजन की जरूरत काफी ज्यादा होती है। पर इस तरह की स्थिति के दौरान, यह भी एक सच है, कि दिमाग में पॉलीसैचुरेटेड फैटी एसिड और लिपिड की मात्रा काफी ज्यादा होती है, जिसकी वजह से शरीर में ऑक्सीडेशन की क्रिया के दौरान निकलने वाले फ्री-रेडिकल्स सबसे ज्यादा हमारे दिमाग को ही नुकसान पहुंचाते हैं। 

आपको बता दें, कि ऑक्सीडेशन की क्रिया के दौरान निकलने वाले फ्री-रेडिकल्स दिमाग की कोशिकाओं को खत्म करते रहते हैं, जिसकी वजह से, बहुत सारे लोग अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी गंभीर समस्या से जूझते हैं। दरअसल, इस तरह की स्थिति में हम अपने दिमाग कई चीजों का सेवन करके सेहतमंद रख सकते हैं, जैसे कि सुबह-सुबह सेहतमंद डाइट का सेवन करना और इसके अलावा सुबह- सुबह खाली पेट एक चम्मच शहद का सेवन करना दिमाग के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता है। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि क्या सच में सुबह खाली पेट 1 चम्मच शहद का सेवन करना दिमाग के लिए फायदेमंद होता है, इसके पीछे क्या कारण है?

हमारे दिमाग के लिए एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं बहुत जरूरी

दरअसल, हमारे शरीर में होने वाली ऑक्सीडेशन की क्रिया को रोकने के लिए, एंटी-ऑक्सीडेंट्स की काफी ज्यादा जरूरत होती है। और आम तौर पर, इस तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स हमको खाने-पीने की चीजों से ही प्राप्त होते हैं। आम तौर पर, इसलिए जो लोग नैचुरल चीजों का सेवन काफी ज्यादा करते हैं, दरअसल, उसको बुढ़ापा और याददाश्त के नुक्सान जैसी समस्यायों से पीड़ित होने की सम्भावना काफी ज्यादा कम होती है। असल में, इस तरह की स्थिति में अपने दिमाग को सेहतमंद रखने के लिए, विटामिन सी, विटामिन इ, जिंक, बीटा कैरोटीन और सेलेनियम आदि जैसे कई तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है। 

इसलिए, रोजाना सुबह खाली पेट ऐसी चीजों का सेवन करें, जो शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हो। इससे आपका दिमाग और शरीर दोनों लंबे समय तक सेहतमंद रहेंगे। इस तरह की ही एक चीज शहद है, जो हम सभी के घरों में पाया जाता है।

एंटीऑक्सीडेंट्स का भंडार है शहद

आयुर्वेद में भी शहद का काफी ज्यादा महत्व है और आज के साइंस ने भी शहद को बहुत असरदार दवा माना है। आपको बता दें, कि बेहतर गुणवत्ता वाले शहद में कई तरह के ऑर्गेनिक एसिड्स और फ्लैवोनॉइड्स जैसे फेनॉलिक कंपाउंड्स पाए जाते हैं, जो आम तौर पर, हमारे खून में घुलकर, शरीर को होने वाली बीमारियों और फ्री रेडिकल्स से लड़ने में सहायता प्रदान करता है। 

हर सुबह खाली पेट 1 चम्मच शहद का सेवन आपको रखेगा सेहतमंद और एक्टिव

दरअसल, रोज़ सुबह उठकर 1 गिलास गुनगुने पानी में 1 चम्मच ऑर्गेनिक अच्छी क्वालिटी का शहद घोलकर रोज़ सुबह खाली पेट पिएं। इसके बाद, 30 मिनट तक कुछ भी न खाएं। इसका रोजाना सेवन आपके शरीर को ऊर्जा और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रदान करता है और साथ ही इससे आपके शरीर और दिमाग लंबे समय तक सेहतमंद रहेंगे। इस तरह की स्थिति में, बस एक ही चीज का ध्यान रखें, कि अगर आपको डायबिटीज या फिर पीसीओडी जैसी कोई समस्या है, तो इसका सेवन करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 

निष्कर्ष

आयुर्वेद और आज के साइंस ने भी शहद को काफी असरदार दवा माना है। बेहतर गुणवत्ता वाले शहद में कई तरह के ऑर्गेनिक एसिड्स और फ्लैवोनॉइड्स जैसे फेनॉलिक कंपाउंड्स पाए जाते हैं। इसलिए रोज़ सुबह उठकर खाली पेट 1 चम्मच शहद का सेवन शरीर और दिमाग को लंबे समय तक सेहतमंद रखता है। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर आप दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या से परेशान हैं और आप इसका समाधान चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर अपनी अप्वाइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Categories
brain health health Hindi

अपने दिमाग को तेज और एक्टिव बनाये रखने के लिए अपनाएं ये 5 असरदार तरीके, आपको मिलेगा फायदा

Loading

दरअसल, हम दिन में, जो कुछ भी करते हैं, उसका असर हमारे दिमाग पर होता है, जैसे कि हमारी रोजाना की दिनचर्या और आदतों का हमारे दिमाग के काम करने के तरीके पर गहरा असर पड़ता है। आपको बता दें कि इस भाग दोड़ भरी जिन्दी में, अक्सर लोग अपने दिमाग को एक्‍ट‍िव और तेज बनाए रखना भूल जाते हैं, या फिर इसके लिए काफी समय नहीं निकाल पाते हैं। हालांकि, अगर आप दिन में कुछ समय सिर्फ अपने लिए निकालते हैं, तो आप अपने दिमाग की मेमोरी, फोकस और क्रिएटिविटी को काफी ज्यादा बेहतर बना सकते हैं। इस तरह की स्थीत में, चाहे आप घर पर हों, चाहे आप ऑफिस में हों या फिर सफर में हों, अपने लिए थोड़ा सा वक्त निकालने की आदत कहीं पर भी अपनाई जा सकती हैं। ऐसा करने से आपके दिमाग का ध्यान केंद्रित रहेगा, आपकी याददाश्त काफी ज्यादा मजबूत होगी और मानसिक थकान कम होगी। आम तौर पर, अगर आप अपने दिमाग को स्वस्थ और एक्‍ट‍िव बना कर रखना चाहते हैं, तो आप दिन में अपने लिए थोड़ा सा समय निकालकर कुछ असरदार तरीकों को अपना सकते हैं और खुद में बदलाव महसूस कर सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से इसके बारे में, विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि वह कौन से असरदार तरीके हैं, जिनको अपनाकर आप अपने दिमाग को तेज और एक्टिव बनाये रख सकते हैं?

दिमाग को तेज और एक्टिव बनाए रखने के 5 असरदार तरीके

  1. ब्रेन पजल्स को सुलझाएं 

आम तौर पर, नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाश‍ित हुई एक शोध के अनुसार, ब्रेन पजल्स को सुलझाने से ड‍िमेंश‍िया जैसी समस्या से पीड़ित मरीजों की मानसिक सेहत में काफी ज्यादा सुधार देखा गया है। पजल्स जैसे कि सुडोकू, क्रॉसवर्ड या फिर गणितीय जैसी पहेलियों को हल करने से दिमाग के काम करने के तरीके में काफी ज्यादा तेजी आती है। इसके साथ ही, यह आपकी समस्या को हल करने की क्षमता और याद रखने की शक्ति को बेहतर बनाते है। 

  1. नया शब्द सीखें

वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी की हाल ही में हुई एक शोध के अनुसार, किसी व्यक्ति के लिए रोजाना एक नए शब्द को सीखना और साथ ही उसका इस्तेमाल करना उसकी भाषा और सोचने की शक्ति को काफी ज्यादा तेज करता है। आम तौर पर, इस तरह की तकनीक सतर्कता को बढ़ाने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान कर सकती है। 

  1. स्केचिंग करें

दरअसल, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में हुए एक शोध के अनुसार, डूडल‍िंग या फिर स्‍केचिंग जैसी तकनीकों को करने से द‍िमाग की रचनात्मकता और साथ ही याद रखने की शक्ति में काफी ज्यादा बढ़ोतरी होती है। आपको बता दें कि यह मानसिक तनाव को काफी ज्यादा कम करने और दिमाग के फोकस को बेहतर बनाने का एक असरदार तरीका है।

निष्कर्ष

अपने दिमाग को स्वस्थ और एक्टिव बनाए रखने के लिए आप दिन में अपने लिए थोड़ा सा समय निकालकर ब्रेन पजल्स सॉल्व करना, नया शब्द सीखना और स्केचिंग करना जैसे असरदार तरीकों को अपना सकते हैं। अगर आपको दिमाग से जुड़ी कोई भी समस्या है, तो आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर इसके विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Categories
brain health health Hindi

क्या ज्यादा धूम्रपान करने से बढ़ सकता है दिमाग का खतरा, इसे कैसे छोड़ें, जानिए डॉक्टर से

Loading

अपनी जीवनशैली में गलत आदतें अपनाने की वजह से लोगों को अक्सर कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गलत आदतें जैसे कि रोजाना काफी ज्यादा मात्रा में शराब का पीना और रोजाना धूम्रपान करना जैसी बुरी आदतों की वजह से बहुत सारे लोगों को कई तरह की गंभीर समस्यायों का सामना करना पड़ता है, जो एक समय पर आकर यह समस्याएं काफी ज्यादा जटिल हो जाती हैं। इस तरह की आदतों को अपनाने के कारण आपकी जिंदगी भी खतरे में पड़ सकती है, जैसे कि रोजाना बहुत ज्यादा धूम्रपान करने की वजह से दिमाग का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है, जिसमें आपको रक्तस्राव स्ट्रोक जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है जिसके कारण आपके मरने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। इस दौरान, कई लोगों के मन में आता है, क्या वाकई बहुत ज्यादा धूम्रपान करने से दिमाग का खतरा बढ़ सकता है और अगर इस तरह की स्थिति पैदा होती है, तो धूम्रपान की आदत को कैसे छोड़ा जा सकता है? तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि धूम्रपान की आदत को कैसे छोड़ा जा सकता है?

क्या ज्यादा धूम्रपान करने से बढ़ सकता है दिमाग का खतरा?

आपको बता दें, कि इसी विषय पर आधारित एक नया अध्ययन, जो बहुत ही ज्यादा धूम्रपान करने वाले लोगों को चेतावनी देता है। आम तौर पर, शोधकर्ताओं ने, कुल मिलाकर इस अध्ययन में फिनलैंड में 16 हजार से भी ज्यादा समान-सेक्स जुड़वा जोड़ों के डेटा की जांच की, जिसमें पाया गया कि सबरैचनोइड हेमरेज के कारण 120 लोगों की जान चली गई। इसके साथ ही, इस तरह की स्थिति में मरने वालों की औसत उम्र लगभग 61 साल की थी। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि यह एक प्रकार का रक्तस्रावी स्ट्रोक है, जो आम तौर पर, एक व्यक्ति के दिमाग को कवर करने वाली झिल्ली के बिल्कुल नीचे की तरफ होता है। तो इस अध्ययन से पता लगता है, कि रोजाना बहुत ज्यादा धूम्रपान करने की वजह से दिमाग का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है, जिसमें आपको रक्तस्राव स्ट्रोक जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है, जिससे आपकी जान भी जा सकती है। 

रक्तस्राव और धूम्रपान के बीच क्या संबंध है?

आपको बता दें, कि रक्तस्राव और धूम्रपान सीधे तौर पर आपस में जुड़े हुए हैं। इन दोनों का आपस में सीधा संबंध इसलिए है, क्योंकि जब धूम्रपान का सेवन किया जाता है, तो यह दिमाग की रक्त वाहिकाओं को सीधा नुकसान पहुंचता है। इसके साथ ही, यह रक्तस्रावी स्ट्रोक सहित कई तरह के जोखिम को बढ़ावा देता है। रक्तस्रावी स्ट्रोक जैसी समस्या का पता चलते ही आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी जान बच सकती है या फिर आपकी हालत में सुधार आ सकता है। 

कैसे छोड़ें धूम्रपान

धूम्रपान को छोड़ने के तरीके इस प्रकार हैं, जैसे कि 

  1. पिल्स के बारे में जानें

आम तौर पर, अगर आप रोजाना धूम्रपान का सेवन करते हैं, और इस बुरी आदत से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो इस दौरान आपके लिए इस की दवाइयों के बारे में जानकारी लेना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। इस दौरान आप दवाइयों की सहायता से धूम्रपान की आदत पर रोक लगा सकते हैं। इसकी मदद से धूम्रपान कम मज़ेदार हो सकता है। 

  1. खुद को एक ब्रेक दें

काम की भागदौड़ के बीच, अपने आप को आराम देना बहुत ही ज्यादा जरूरी हो होता है। इस तरह की स्थिति में, आप बुरी आदतों से बचने और अपनी जिंदगी को अच्छे तरीके से जीने के नए तरीकों के बारे में जान सकते हैं। दरअसल, बुरी आदतों से बचने और जिंदगी को नए तरीके से जीने के कई ऐसे विकल्प हो सकते हैं, जैसे व्यायाम कर सकते हैं, अपने पसंदीदा संगीत को सुन सकते हैं, या फिर अपने शौक को पूरा करने के लिए कुछ वक्त अपने लिए निकाल सकते हैं। 

  1. फल और सब्जियां खाएं

आम तौर पर अगर आप धूम्रपान छोड़ना या फिर इस बुरी आदत से बचना चाहते हैं, तो इसके लिए आप अपनी डाइट में फल और सब्जियों की संख्या बड़ा सकते हैं और उनसे ही अपना पेट भर सकते हैं। दरअसल, जब कभी भी आपका धूम्रपान करने का मन करें, तो आप धूम्रपान को छोड़कर फल और सब्जियों का सेवन कर सकते हैं, या फिर इसकी जगह साबुत अनाज का सेवन कर सकते हैं। यह आपको धूम्रपान की लगी आदत को छोड़ने में काफी ज्यादा सहयता प्रदान करेगा।

निष्कर्ष

गलत आदतें अपनाने की वजह से लोगों को अक्सर कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। रोजाना बहुत ज्यादा धूम्रपान करने की वजह से दिमाग का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है, जिसमें आपको रक्तस्राव स्ट्रोक जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है, इससे आपके मरने का खतरा भी बढ़ सकता है। पिल्स के बारे में जानकर, खुद को एक ब्रेक देकर और फल और सब्जियों का सेवन करके आप धूम्रपान को छोड़ सकते हैं। अगर आपको भी धूम्रपान के कारण दिमाग में किसी भी तरह की, रक्तस्रावी स्ट्रोक जैसी समस्या हो गयी है और आप इस समस्या का इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Categories
Hindi

अष्टांग योग करने से दिमाग शांत और तनाव मुक्त रहता है, जाने इसके फायदे

Loading

अष्टांग योग आमतौर पर सबसे बढ़िया और लोकप्रिय योग शैलियों में से एक माना जाता है। दरअसल, अष्टांग योग करने से हमारा दिमाग शांत और तनाव मुक्त रहता है। इस को मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। इसे करने से आप दिनभर ऊर्जावान और शारीरिक तौर पर मजबूत महसूस करते हैं। दरअसल, इसका रोजाना अभ्यास आपके मन को सकारात्मक विचारों से भर देता है। यह आपके ध्यान और एकाग्रता में काफी ज्यादा सुधार लाता है और दिमागी तौर पर हमारे ध्यान को केंद्रित करता है। इसकी सहायता से आपकी मांसपेशियों और जोड़ों में भी मजबूती आती है और साथ में यह शरीर का फैट तेजी से कम करने और आपके दिमागी संतुलन को बढ़ाने में मदद करता है। इसका नियमित अभ्यास आपको कई तरह के तनावों से छुटकारा दिलाता है। इसके अलावा यह शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत बनाता है और शरीर को लचीला बनाने में मददगार साबित होता है। आमतौर पर, जब आप इस तरह के योग से शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ और फिट होने का अहसास करते हैं, तो इससे आपका दिमाग भी काफी ज्यादा शांत रहता है। तो आइये इस लेख के माध्यम से अष्टांग योग को कैसे किया जा सकता है और इसके क्या -क्या फायदे हो सकते हैं, इसके बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। 

अष्टांग योग के फायदे 

वैसे तो, अष्टांग योग के कई फायदे होते है, जिस की सहायता से आप न केवल तनाव से छुटकारा पा सकते हैं, बल्कि, पढ़ाई-लिखाई करने वाले बच्चे अपने मन को एकाग्र कर सकते हैं और बड़ी से बड़ी परेशानियों को आसानी से हल कर पाते हैं। इसके कुछ फायदे इस प्रकार हैं:

  1. अष्टांग योग की सहायता से आपको फोकस और एकाग्रता बढ़ाने में मदद प्राप्त होती है। 
  1. दिनभर की गतिविधियों से होने वाली थकान और तनाव से आप दूर रहे सकते हैं। 
  1. इसके नियमित अभ्यास से आपको काफी अच्छी नींद आती है। 
  1. आपका दिमाग फालतू की चीजों को नहीं सोचता वह शांत रहता है। 
  1. अष्टांग योग की सहायता से आप आसानी से अपने वजन को कम कर सकते हैं। 
  1. इससे, हमारा हाई ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है। 

अष्टांग योग करने का तरीका 

बेशक, अष्टांग योग के अनेकों फायदे होते हैं और इसको करने से दिमाग शांत और तनाव मुक्त रहता है। पर आम तौर पर, यह एक कठिन प्रकार का योग होता है। अगर आप इस का अभ्यास करने की सोच रहे हैं, तो आपको सब से पहले इसकी मूल बातों को समझना होगा और इसको शुरू करने से पहले आपको मैसूर शैली का अष्टांग योग करना होगा। इसको करने के लिए आप योग गुरुओं की सहायता ले सकते हैं, इसकी मदद से आप अपनी रूटीन और बनतर को सुधार सकते हैं, जिससे कि आपको सहनशक्ति, फुर्ती और लचीलापन प्राप्त होता है। अष्टांग योग की कोशिश करने से पहले हठ योग या फिर आयंगर योग जैसे कम गहन अभ्यास आपके लिए एक अच्छे विकल्प हो सकते हैं। 

निष्कर्ष: 

जिम्मेदारिओं के चलते ज्यादातर लोग तनाव और चिड़चिड़ेपन में रहते हैं। अपने दिमाग को शांत और तनाव मुक्त रखने के लिए आप अष्टांग योग का सहारा ले सकते हैं। यह मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होता है। रोजाना अष्टांग योग का अभ्यास करने से दिनभर की गतिविधियों से होने वाली थकान और तनाव से छुटकारा मिलता है, काफी अच्छी नींद आती है, और इससे कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज भी कंट्रोल होती है। अष्टांग योग करने का तरीका बहुत ही अलग और एक कठिन प्रकार का योग होता है। इसके लिए आप योग गुरूओं की सहायता ले सकते हैं। अगर यह योग करने के बावजूद भी आपका तनाव कम नहीं हो रहा है, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर आप इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।