क्या आम इंसान को अचानक से पड़ सकता है मिर्गी का दौरा? डॉक्टर से जानें इसके कारण और लक्षणों के बारे में!

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क्या आम इंसान को अचानक से पड़ सकता है मिर्गी का दौरा? डॉक्टर से जानें इसके कारण और लक्षणों के बारे में!

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दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि मिर्गी हमारे दिमाग से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसमें एक पीड़ित व्यक्ति को बार -बार दौरे पड़ते हैं। मिर्गी को दुनिया भर में एक चौथा और सबसे आम न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर माना जाता है। इसके मुख्य कारणों में स्ट्रोक और कुछ विशेष संक्रमण शामिल हो सकते हैं, जिसका समय पर इलाज होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि न केवल भारत में 12 मिलियन मिर्गी के मरीज पाए जाते हैं, बल्कि इनमें से 30 से 40 प्रतिशत मरीज इस तरह के होते हैं, जिनके पास इसका इलाज करवाने का सर्जरी ही एकमात्र विकल्प होता है। इसके अलावा, केवल भारत में हर साल 500 सर्जरी अकेले मिर्गी के मरीजों की ही की जाती हैं। असल में, ज्यादातर मिर्गी के मरीजों का इलाज दवाइयों से ही किया जाता है, जिससे मिर्गी के दौरे पड़ना काफी ज्यादा कम हो जाता है। ऐसे में, कई लोगों के मन में, यह सवाल जरूर आता है, कि क्या एक आम इंसान को भी अचानक से मिर्गी का दौरा पड़ सकता है? तो इस सवाल का जवाब यही है, कि हाँ एक आम इंसान को भी अचानक से मिर्गी का दौरा पड़ सकता है। दरअसल, यह मिर्गी के दौरे तब पड़ते हैं, जब एक व्यक्ति के दिमाग में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी अचानक से काबू से बाहर हो जाती है। जिसका समाधान करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी लेते हैं। 

मिर्गी के लक्षण क्या हो सकते हैं?

आम तौर पर, ज्यादातर मिर्गी के लक्षण इस बात पर ही निर्भर करते हैं, कि पीड़ित व्यक्ति के दिमाग का कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। मिर्गी जैसी समस्या के लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. मिर्गी जैसी समस्या के दौरान दौरा पड़ने पर पूरी तरीके से होश खो बैठना। 
  2. इस दौरान, कुछ लोगों को सुनने और देखने में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 
  3. मिर्गी का दौरा पड़ने पर पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में काफी ज्यादा दिक्क्त महसूस हो सकती है। 
  4. मिर्गी जैसी समस्या के दौरान पीड़ित व्यक्ति किसी भी जगह को टिकटिकी लगाकर घूर सकता है। 
  5. इस दौरान पीड़ित व्यक्ति होंठ चटकाना और हाथ रगड़ने जैसा असामान्य व्यवहार भी कर सकता है। 
  6. दौरा पड़ने के दौरान पीड़ित व्यक्ति का दिल तेजी से या फिर धीमी गति से धड़क सकता है। 
  7. दौरे के दौरान पीड़ित व्यक्ति की आँखें ऊपर की तरह उठ सकती हैं। 
  8. इस तरह की स्थिति उत्पन्न होने पर कुछ लोगों की जीभ भी कट सकती है।

मिर्गी के कारण क्या होते हैं?

दरअसल, डॉक्टर के अनुसार लगभग 50 प्रतिशत मामलों में मिर्गी जैसी समस्या का किसी भी तरह का कोई भी स्पष्ट कारण नहीं मिलता है। पर इसके कारणों में कुछ निम्नलिखित कारक शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. सिर पर गहरी चोट लगना: दरअसल, जिन लोगों को किसी दुर्घटना के दौरान या फिर दीवार पर सिर लगने पर सिर पर चोट लग जाती है, तो उन लोगों में मिर्गी का दौरा पड़ने का जोखिम काफी ज्यादा होता है। 
  2. जेनेटिक होना: आम तौर पर, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि मिर्गी जैसी समस्या में दौरे पड़ना जेनेटिक भी हो सकता है। यानी कि अगर परिवार में इस तरह की समस्या का इतिहास बना हुआ है, जैसे कि यह समस्या पहले से ही मम्मी-पापा या फिर दादा-दादी को हुई है, तो आप में भी इस तरह की समस्या का जोखिम हो सकता है। 
  3. दिमाग से जुड़ी कुछ समस्याओं का होना: दरअसल, इस दौरान दिमाग से जुड़ी कुछ समस्याएं, जैसे कि दिमाग का ट्यूमर और स्ट्रोक होने की वजह से भी मिर्गी के दौरे पड़ना जैसी समस्या हो सकती है। 
  4. संक्रमण होना: इस तरह की स्थिति में एचआईवी और वायरल एन्सेफेलाइटिस जैसे संक्रमणों की वजह से भी एक व्यक्ति को मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं। इसके अलावा, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर के कारण भी मिर्गी के दौरे पड़ने जैसी समस्या हो सकती है। 

निष्कर्ष: दरअसल, मिर्गी की समस्या एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो हमारे दिमाग से जुड़ी होती है। इस दौरान, न केवल पीड़ित व्यक्ति को दौरे पड़ते हैं, बल्कि वह अपने होश को भी खो बैठता है। हाँ यह बात बिल्कुल सच है, कि एक आम इंसान को भी अचानक से मिर्गी का दौरा पड़ सकता है। मिर्गी का दौरा तब पड़ता है, जब हमारे दिमाग में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी अचानक से काबू से बहार हो जाती है। यह समस्या कई कारणों से हो सकती है, जिस में सिर में गहरी चोट लगना, पारिवारिक इतिहास होना और दिमाग से जुड़ी कुछ समस्याओं का होना शामिल हो सकता है। इस समस्या के दौरान आपको कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जिन का समय पर इलाज होना अत्यंत जरूरी होता है। मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति की अच्छे से देखभाल करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसकी गंभीर स्थिति उत्पन्न होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी तरह की गंभीर समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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पेट का माइग्रेन क्या होता है? डॉक्टर से जाने इसके कारण, लक्षण और उपचार के विकल्पों के बारे में

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आज के समय में, ऐसी कई समस्याएं हैं, जो सिर्फ बड़ो को ही नहीं, बल्कि बच्चों को भी प्रभावित करती हैं, जैसे कि पेट का माइग्रेन। आम तौर पर, पेट का माइग्रेन एक तरीके का माइग्रेन होता है, जो विशेष रूप से छोटे बच्चों पर बुरा असर डालता है। पर, ऐसा भी नहीं है, कि यह सिर्फ बच्चों को ही प्रभावित करता है, दरअसल यह समस्या बड़ों में भी हो सकती है। दरअसल, इस तरह की समस्या में, एक बार नहीं, बल्कि बार बार पेट में दर्द की समस्या उत्पन्न होती है, जिसकी वजह से अक्सर मतली और उल्टी जैसी समस्या का एहसास होता है। हालांकि, पेट का माइग्रेन, दूसरे माइग्रेन की तरह व्यापक रूप से पहचाना नहीं जाता है, पर इस से छुटकारा पाने और इसका इलाज करने के लिए इसके बारे में, जानकारी प्राप्त करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। 

ऐसे में, कई लोगों के मन में सवाल आता है, कि आखिर पेट का माइग्रेन होता क्या है और इसके कारण, लक्षण और उपचार के विकल्प क्या हो सकते हैं? तो दरअसल, पेट का माइग्रेन एक बार-बार होने वाली स्थिति है, जिसमें एक व्यक्ति के पेट में तेज दर्द जैसी समस्या उत्पन्न होती है, जो अक्सर नाभि के आसपास विकसित होती है। दरअसल, इस तरह की स्थिति में, दर्द एक घंटे से लेकर कई दिनों तक बना रह सकता है और यह अक्सर मतली, उल्टी, भूख न लगना, पीलापन और थकान जैसे लक्षणों के साथ उत्पन्न हो सकता है। इसके कारणों में, संक्रामक, पर्यावरणीय और आनुवंशिक या फिर स्वप्रतिरक्षित कारण शामिल हो सकते हैं, जिसका इलाज दर्द निवारक दवाओं, जीवनशैली में बदलाव और आहार में बदलाव करके किया जा सकता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

पेट के माइग्रेन के क्या कारण हो सकते हैं? 

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि पेट के माइग्रेन का सटीक कारण पूरी तरीके से समझा नहीं गया है। पर, इस तरह की स्थिति में कुछ संक्रामक कारक और पर्यावरणीय कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। जैसे कि इसमें शामिल हो सकते हैं:

  1. संक्रामक कारण 
  2. पर्यावरणीय कारण
  3. आनुवंशिक या फिर स्वप्रतिरक्षित कारण

पेट के माइग्रेन के क्या लक्षण हो सकते हैं?

दरअसल, आम माइग्रेन के उल्ट, पेट के माइग्रेन में सिर दर्द जैसे लक्षण नहीं होते हैं, जिसकी वजह से इन की पहचान करना काफी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हर व्यक्ति में पेट के माइग्रेन के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, जिसमें निम्नलिखित लक्षण शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. पेट में तेज दर्द होना। 
  2. मतली और उल्टी की समस्या होना। 
  3. पीड़ित व्यक्ति को भूख न लगना। 
  4. चेहरे का पीला पड़ जाना। 
  5. व्यक्ति का अक्सर थका हुआ महसूस करना। 

पेट के माइग्रेन के उपचार के विकल्प क्या हो सकते हैं? 

पेट के माइग्रेन के इलाज में दवाओं और साथ में जीवनशैली में बदलाव का संयोजन शामिल होता है। दरअसल, पेट के माइग्रेन के उपचार विकल्पों में निम्नलिखित विकल्प शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

चिकित्सा उपचार में शामिल हो सकते हैं:

  1. दर्द कम करने वाली दवाएं।
  2. मतली और उल्टी को कंट्रोल करने की दवाएं।
  3. रोकथाम की दवाएं।

गैर-औषधीय उपचार में शामिल हो सकते हैं:

  1. आहार में बदलाव।
  2. जीवनशैली में बदलाव।
  3. वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियाँ। 

निष्कर्ष: दरअसल, पेट का माइग्रेन एक बार-बार होने वाली समस्या है, जिसमें एक व्यक्ति के पेट में तेज दर्द जैसी समस्या उत्पन्न होती है, जो अक्सर नाभि के आसपास विकसित होती है। इस तरह की समस्या में, एक बार नहीं, बल्कि बार बार पेट में दर्द की समस्या उत्पन्न होती है, जिसकी वजह से अक्सर मतली, उल्टी, भूख न लगना, चेहरे का पीला पड़ जाना जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। संक्रामक, पर्यावरणीय और आनुवंशिक आदि इसके कारण होते हैं, जिनका उपचार दर्द निवारक दवाओं और जीवनशैली में बदलाव करके किया जा सकता है। अगर आपको भी पेट का माइग्रेन जैसी कोई समस्या है और आप इसका इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न 1. पेट के माइग्रेन के मुख्य लक्षण क्या हो सकते हैं? 

दरअसल, इस तरह की स्थिति में, पेट के माइग्रेन के मुख्य लक्षणों में, पेट में तेज दर्द होना, मतली होना, उल्टी होना, और साथ में भूख न लगना शामिल हो सकता है। पेट का माइग्रेन, मतलब की इसमें, दर्द ऐंठन वाला होता है और यह समस्या अक्सर नाभि के आसपास हो सकती है। 

प्रश्न 2. क्या बड़ों में भी पेट का माइग्रेन जैसी समस्या देखने को मिल सकती है?

हाँ बिलकुल, पेट के माइग्रेन जैसी समस्या बड़ो में भी देखने को मिल सकती है। हालाँकि, पेट का माइग्रेन सबसे ज्यादा बच्चों में देखने को मिल सकता है, पर यह बड़ो में भी हो सकता है। विशेष कर उन लोगों में, जिनको पहले से ही पेट के माइग्रेन जैसी समस्या हो चुकी होती है। 

प्रश्न 3. क्या पेट के माइग्रेन की वजह से कोई जटिलता हो सकती है? 

जी हां, समय पर इलाज न मिलने वाले पेट के माइग्रेनन की वजह से आपको लगातार, गंभीर दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, पोषण में कमी और चिंता जैसी मनोवैज्ञानिक जटिलताएं हो सकती हैं।

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क्या घर में बिल्ली रखने से बढ़ सकता है, इस मानस‍िक बीमारी का खतरा, जाने डॉक्टर से

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आज के समय में, ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिनको घर में बिल्ली पालने का काफी ज्यादा शौक होता है। दरअसल, ऐसा बहुत बार देखने को मिलता है, कि किसी के घर में एक तो किसी के घर में एक से ज्‍यादा बिल्लियां मौजूद होती हैं। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में, पालतू जानवरों के प्रेमिओं के लिए एक हैरान कर देने वाली बात सामने आई है, जिसमें यह कहा गया है, कि बिल्ली को पालने या फिर उसको छूने पर मानस‍िक ड‍िसआर्डर सिजोफ्रेनिया का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है। दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि की गई इस स्टडी के नतीजों को सही तरीके से समझना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। आपको बता दें, कि वैज्ञानिकों द्वारा की गई ये स्टडी दरअसल कारण और परिणाम को नहीं दिखती है, बल्कि यह केवल एक संबंध को दिखाती है। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि क्या वाकई स्टडी में सामने आई बातों के अनुसार, बिल्ली पालने से मानसिक डिसऑर्डर सिजोफ्रेनिया हो सकता है?

बिल्लियों को पालने से सिज़ोफ्रेनिया हो सकता है: स्टडी

आपको बता दें, कि ऑस्ट्रेलिया में क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में पाया गया कि बिल्ली पालने की वजह से सिज़ोफ्रेनिया जैसी समस्या का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है। आम तौर पर, इस स्टडी में पाया गया है कि जो लोग ज्यादातर इन बिल्लियों को अपने घरों में रखते हैं, और जो लोग ज्यादातर इनके संपर्क में रहते हैं, उनमें सिज़ोफ्रेनिया जैसी समस्या होने का खतरा असल में लगभग दोगुना होता है।

बिल्लियां पालने का मानसिक बीमारी से कोई संबंध नहीं होता है

दरअसल, यह रिसर्च पिछले अध्ययन पर आधारित है, जिसमें मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया और टोक्सोप्लाज्मा गोंडी नाम के एक छोटे पैरासाइट के बीच एक संबंध दिखाया गया था, और यह पैरासाइट बिल्ली के मल में पाया जाता है। पर डॉक्टर से अनुसार, टोक्सोप्लाज्मोसिस पर कई सालों से रिसर्च हो रही है, क्योंकि इसके कारण दिमाग पर हल्के प्रभाव दिखाई दे सकते हैं, जैसे कि न्यूरोट्रांसमीटर और सूजन, पर ज्यादातर जो लोग इस पैरासाइट के संपर्क में आते हैं, दरअसल उन व्यक्तियों में किसी भी तरह का कोई लक्षण या फिर मानसिक समस्या नहीं होती है। डॉक्टर के अनुसार, कभी-कभी यह बीमारी, इन्फेक्शन या फिर इम्यून सिस्टम रिएक्शन के कारण भी हो सकती है। इसलिए, बिल्ली को पालना या फिर कभी-कभी सहलाना चिंता की बात नहीं होनी चाहिए।

सिजोफ्रेनिया होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं

सिजोफ्रेनिया जैसी समस्या होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। दरअसल, सिजोफ्रेनिया एक मल्टी फैक्टोरियल बीमारी है, यानी कि यह कई तरह के कारणों से मिलकर हो सकती है। आम तौर पर, इसमें बचपन के मुश्किल हालात, तनाव, जेनेटिक कारण और दिमाग में केमिकल्‍स का असंतुलन शामिल हो सकता है। दरअसल, यह सभी कारक मिलकर सिजोफ्रेनिया में योगदान डालते हैं। आपको बता दें, कि न्यूरॉन्स के बीच संबंध टूटने और दिमाग के सर्किट में गड़बड़ी होने की वजह से एक इंसान की सोच, समझ, अनुभव और व्यवहार पर काफी ज्यादा असर पड़ता है।

बिल्ली पाल रहे हैं तो रखें इन बातों का ख्‍याल

आम तौर पर, घर में बिल्ली पालते वक्त कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है, जैसे कि 

  1. बिल्ली का लिटर बॉक्स साफ करने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह धोएं।
  2. दरअसल, इस दौरान केवल जानवरों की साफ-सफाई के आसान तरीके ही काफ़ी होते हैं। जानवरों को पालते वक्त या फिर उनकी देखभाल करते वक्त कमजोर इम्यूनिटी वाले व्यक्तिों को और प्रेग्नेंट महिलाओं को अपना काफी ज्यादा ध्यान रखना चाहिए।
  3. दरअसल, इस तरह की स्थिति में, बिल्लियाँ हम इंसानों को भावनात्मक सहारा प्रदान करती हैं, हमारे अकेलापन, तनाव और चिंता को काफी ज्यादा दूर करती हैं। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में, बिल्ली पालने के फायदे मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए होने वाले जोखिमों से कहीं ज्यादा होते हैं।

निष्कर्ष: डॉक्टर के अनुसार, बिल्ली घर में रखने से सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारी नहीं होती है, क्योंकि पालतू जानवरों से हमें भावनात्मक सहारा मिलता है। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर अगर आपको दिमाग से जुड़ी कोई समस्या है, जिसका आप इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर इसके विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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सुबह खाली पेट करें 1 चम्मच शहद का सेवन, दिमाग के लिए होता है काफी ज्यादा फायदेमंद, डॉक्टर से जानें इसका कारण

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वैसे तो, शरीर के सभी अंग बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं, पर अगर सभी से यह पूछा जाए, कि हमारे शरीर का सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हिस्सा कौन सा है, तो इस तरह की स्थिति में लगभग सभी का जवाब एक ही होगा, और वह है दिमाग। आपको बता दें, कि दिमाग हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमारे शरीर का संचालन करता है, दरअसल, इसके इशारे पर हमारे शरीर का हर एक फंक्शन काम करता है। आम तौर पर, दिमाग हमारे शरीर में सबसे ज्यादा काम करता है, इलसिए इस दौरान हमारा शरीर जो भी ऊर्जा का उत्पादन करता है, दरअसल उस ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा हमारा दिमाग इस्तेमाल करता है। दरअसल, इसी तरह हमारे शरीर में, दिमाग को ऑक्सीजन की जरूरत काफी ज्यादा होती है। पर इस तरह की स्थिति के दौरान, यह भी एक सच है, कि दिमाग में पॉलीसैचुरेटेड फैटी एसिड और लिपिड की मात्रा काफी ज्यादा होती है, जिसकी वजह से शरीर में ऑक्सीडेशन की क्रिया के दौरान निकलने वाले फ्री-रेडिकल्स सबसे ज्यादा हमारे दिमाग को ही नुकसान पहुंचाते हैं। 

आपको बता दें, कि ऑक्सीडेशन की क्रिया के दौरान निकलने वाले फ्री-रेडिकल्स दिमाग की कोशिकाओं को खत्म करते रहते हैं, जिसकी वजह से, बहुत सारे लोग अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी गंभीर समस्या से जूझते हैं। दरअसल, इस तरह की स्थिति में हम अपने दिमाग कई चीजों का सेवन करके सेहतमंद रख सकते हैं, जैसे कि सुबह-सुबह सेहतमंद डाइट का सेवन करना और इसके अलावा सुबह- सुबह खाली पेट एक चम्मच शहद का सेवन करना दिमाग के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता है। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि क्या सच में सुबह खाली पेट 1 चम्मच शहद का सेवन करना दिमाग के लिए फायदेमंद होता है, इसके पीछे क्या कारण है?

हमारे दिमाग के लिए एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं बहुत जरूरी

दरअसल, हमारे शरीर में होने वाली ऑक्सीडेशन की क्रिया को रोकने के लिए, एंटी-ऑक्सीडेंट्स की काफी ज्यादा जरूरत होती है। और आम तौर पर, इस तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स हमको खाने-पीने की चीजों से ही प्राप्त होते हैं। आम तौर पर, इसलिए जो लोग नैचुरल चीजों का सेवन काफी ज्यादा करते हैं, दरअसल, उसको बुढ़ापा और याददाश्त के नुक्सान जैसी समस्यायों से पीड़ित होने की सम्भावना काफी ज्यादा कम होती है। असल में, इस तरह की स्थिति में अपने दिमाग को सेहतमंद रखने के लिए, विटामिन सी, विटामिन इ, जिंक, बीटा कैरोटीन और सेलेनियम आदि जैसे कई तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है। 

इसलिए, रोजाना सुबह खाली पेट ऐसी चीजों का सेवन करें, जो शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हो। इससे आपका दिमाग और शरीर दोनों लंबे समय तक सेहतमंद रहेंगे। इस तरह की ही एक चीज शहद है, जो हम सभी के घरों में पाया जाता है।

एंटीऑक्सीडेंट्स का भंडार है शहद

आयुर्वेद में भी शहद का काफी ज्यादा महत्व है और आज के साइंस ने भी शहद को बहुत असरदार दवा माना है। आपको बता दें, कि बेहतर गुणवत्ता वाले शहद में कई तरह के ऑर्गेनिक एसिड्स और फ्लैवोनॉइड्स जैसे फेनॉलिक कंपाउंड्स पाए जाते हैं, जो आम तौर पर, हमारे खून में घुलकर, शरीर को होने वाली बीमारियों और फ्री रेडिकल्स से लड़ने में सहायता प्रदान करता है। 

हर सुबह खाली पेट 1 चम्मच शहद का सेवन आपको रखेगा सेहतमंद और एक्टिव

दरअसल, रोज़ सुबह उठकर 1 गिलास गुनगुने पानी में 1 चम्मच ऑर्गेनिक अच्छी क्वालिटी का शहद घोलकर रोज़ सुबह खाली पेट पिएं। इसके बाद, 30 मिनट तक कुछ भी न खाएं। इसका रोजाना सेवन आपके शरीर को ऊर्जा और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रदान करता है और साथ ही इससे आपके शरीर और दिमाग लंबे समय तक सेहतमंद रहेंगे। इस तरह की स्थिति में, बस एक ही चीज का ध्यान रखें, कि अगर आपको डायबिटीज या फिर पीसीओडी जैसी कोई समस्या है, तो इसका सेवन करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 

निष्कर्ष

आयुर्वेद और आज के साइंस ने भी शहद को काफी असरदार दवा माना है। बेहतर गुणवत्ता वाले शहद में कई तरह के ऑर्गेनिक एसिड्स और फ्लैवोनॉइड्स जैसे फेनॉलिक कंपाउंड्स पाए जाते हैं। इसलिए रोज़ सुबह उठकर खाली पेट 1 चम्मच शहद का सेवन शरीर और दिमाग को लंबे समय तक सेहतमंद रखता है। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर आप दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या से परेशान हैं और आप इसका समाधान चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर अपनी अप्वाइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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अपने दिमाग को तेज और एक्टिव बनाये रखने के लिए अपनाएं ये 5 असरदार तरीके, आपको मिलेगा फायदा

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दरअसल, हम दिन में, जो कुछ भी करते हैं, उसका असर हमारे दिमाग पर होता है, जैसे कि हमारी रोजाना की दिनचर्या और आदतों का हमारे दिमाग के काम करने के तरीके पर गहरा असर पड़ता है। आपको बता दें कि इस भाग दोड़ भरी जिन्दी में, अक्सर लोग अपने दिमाग को एक्‍ट‍िव और तेज बनाए रखना भूल जाते हैं, या फिर इसके लिए काफी समय नहीं निकाल पाते हैं। हालांकि, अगर आप दिन में कुछ समय सिर्फ अपने लिए निकालते हैं, तो आप अपने दिमाग की मेमोरी, फोकस और क्रिएटिविटी को काफी ज्यादा बेहतर बना सकते हैं। इस तरह की स्थीत में, चाहे आप घर पर हों, चाहे आप ऑफिस में हों या फिर सफर में हों, अपने लिए थोड़ा सा वक्त निकालने की आदत कहीं पर भी अपनाई जा सकती हैं। ऐसा करने से आपके दिमाग का ध्यान केंद्रित रहेगा, आपकी याददाश्त काफी ज्यादा मजबूत होगी और मानसिक थकान कम होगी। आम तौर पर, अगर आप अपने दिमाग को स्वस्थ और एक्‍ट‍िव बना कर रखना चाहते हैं, तो आप दिन में अपने लिए थोड़ा सा समय निकालकर कुछ असरदार तरीकों को अपना सकते हैं और खुद में बदलाव महसूस कर सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से इसके बारे में, विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि वह कौन से असरदार तरीके हैं, जिनको अपनाकर आप अपने दिमाग को तेज और एक्टिव बनाये रख सकते हैं?

दिमाग को तेज और एक्टिव बनाए रखने के 5 असरदार तरीके

  1. ब्रेन पजल्स को सुलझाएं 

आम तौर पर, नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाश‍ित हुई एक शोध के अनुसार, ब्रेन पजल्स को सुलझाने से ड‍िमेंश‍िया जैसी समस्या से पीड़ित मरीजों की मानसिक सेहत में काफी ज्यादा सुधार देखा गया है। पजल्स जैसे कि सुडोकू, क्रॉसवर्ड या फिर गणितीय जैसी पहेलियों को हल करने से दिमाग के काम करने के तरीके में काफी ज्यादा तेजी आती है। इसके साथ ही, यह आपकी समस्या को हल करने की क्षमता और याद रखने की शक्ति को बेहतर बनाते है। 

  1. नया शब्द सीखें

वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी की हाल ही में हुई एक शोध के अनुसार, किसी व्यक्ति के लिए रोजाना एक नए शब्द को सीखना और साथ ही उसका इस्तेमाल करना उसकी भाषा और सोचने की शक्ति को काफी ज्यादा तेज करता है। आम तौर पर, इस तरह की तकनीक सतर्कता को बढ़ाने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान कर सकती है। 

  1. स्केचिंग करें

दरअसल, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में हुए एक शोध के अनुसार, डूडल‍िंग या फिर स्‍केचिंग जैसी तकनीकों को करने से द‍िमाग की रचनात्मकता और साथ ही याद रखने की शक्ति में काफी ज्यादा बढ़ोतरी होती है। आपको बता दें कि यह मानसिक तनाव को काफी ज्यादा कम करने और दिमाग के फोकस को बेहतर बनाने का एक असरदार तरीका है।

निष्कर्ष

अपने दिमाग को स्वस्थ और एक्टिव बनाए रखने के लिए आप दिन में अपने लिए थोड़ा सा समय निकालकर ब्रेन पजल्स सॉल्व करना, नया शब्द सीखना और स्केचिंग करना जैसे असरदार तरीकों को अपना सकते हैं। अगर आपको दिमाग से जुड़ी कोई भी समस्या है, तो आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर इसके विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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क्या ज्यादा धूम्रपान करने से बढ़ सकता है दिमाग का खतरा, इसे कैसे छोड़ें, जानिए डॉक्टर से

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अपनी जीवनशैली में गलत आदतें अपनाने की वजह से लोगों को अक्सर कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गलत आदतें जैसे कि रोजाना काफी ज्यादा मात्रा में शराब का पीना और रोजाना धूम्रपान करना जैसी बुरी आदतों की वजह से बहुत सारे लोगों को कई तरह की गंभीर समस्यायों का सामना करना पड़ता है, जो एक समय पर आकर यह समस्याएं काफी ज्यादा जटिल हो जाती हैं। इस तरह की आदतों को अपनाने के कारण आपकी जिंदगी भी खतरे में पड़ सकती है, जैसे कि रोजाना बहुत ज्यादा धूम्रपान करने की वजह से दिमाग का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है, जिसमें आपको रक्तस्राव स्ट्रोक जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है जिसके कारण आपके मरने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। इस दौरान, कई लोगों के मन में आता है, क्या वाकई बहुत ज्यादा धूम्रपान करने से दिमाग का खतरा बढ़ सकता है और अगर इस तरह की स्थिति पैदा होती है, तो धूम्रपान की आदत को कैसे छोड़ा जा सकता है? तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि धूम्रपान की आदत को कैसे छोड़ा जा सकता है?

क्या ज्यादा धूम्रपान करने से बढ़ सकता है दिमाग का खतरा?

आपको बता दें, कि इसी विषय पर आधारित एक नया अध्ययन, जो बहुत ही ज्यादा धूम्रपान करने वाले लोगों को चेतावनी देता है। आम तौर पर, शोधकर्ताओं ने, कुल मिलाकर इस अध्ययन में फिनलैंड में 16 हजार से भी ज्यादा समान-सेक्स जुड़वा जोड़ों के डेटा की जांच की, जिसमें पाया गया कि सबरैचनोइड हेमरेज के कारण 120 लोगों की जान चली गई। इसके साथ ही, इस तरह की स्थिति में मरने वालों की औसत उम्र लगभग 61 साल की थी। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि यह एक प्रकार का रक्तस्रावी स्ट्रोक है, जो आम तौर पर, एक व्यक्ति के दिमाग को कवर करने वाली झिल्ली के बिल्कुल नीचे की तरफ होता है। तो इस अध्ययन से पता लगता है, कि रोजाना बहुत ज्यादा धूम्रपान करने की वजह से दिमाग का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है, जिसमें आपको रक्तस्राव स्ट्रोक जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है, जिससे आपकी जान भी जा सकती है। 

रक्तस्राव और धूम्रपान के बीच क्या संबंध है?

आपको बता दें, कि रक्तस्राव और धूम्रपान सीधे तौर पर आपस में जुड़े हुए हैं। इन दोनों का आपस में सीधा संबंध इसलिए है, क्योंकि जब धूम्रपान का सेवन किया जाता है, तो यह दिमाग की रक्त वाहिकाओं को सीधा नुकसान पहुंचता है। इसके साथ ही, यह रक्तस्रावी स्ट्रोक सहित कई तरह के जोखिम को बढ़ावा देता है। रक्तस्रावी स्ट्रोक जैसी समस्या का पता चलते ही आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी जान बच सकती है या फिर आपकी हालत में सुधार आ सकता है। 

कैसे छोड़ें धूम्रपान

धूम्रपान को छोड़ने के तरीके इस प्रकार हैं, जैसे कि 

  1. पिल्स के बारे में जानें

आम तौर पर, अगर आप रोजाना धूम्रपान का सेवन करते हैं, और इस बुरी आदत से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो इस दौरान आपके लिए इस की दवाइयों के बारे में जानकारी लेना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। इस दौरान आप दवाइयों की सहायता से धूम्रपान की आदत पर रोक लगा सकते हैं। इसकी मदद से धूम्रपान कम मज़ेदार हो सकता है। 

  1. खुद को एक ब्रेक दें

काम की भागदौड़ के बीच, अपने आप को आराम देना बहुत ही ज्यादा जरूरी हो होता है। इस तरह की स्थिति में, आप बुरी आदतों से बचने और अपनी जिंदगी को अच्छे तरीके से जीने के नए तरीकों के बारे में जान सकते हैं। दरअसल, बुरी आदतों से बचने और जिंदगी को नए तरीके से जीने के कई ऐसे विकल्प हो सकते हैं, जैसे व्यायाम कर सकते हैं, अपने पसंदीदा संगीत को सुन सकते हैं, या फिर अपने शौक को पूरा करने के लिए कुछ वक्त अपने लिए निकाल सकते हैं। 

  1. फल और सब्जियां खाएं

आम तौर पर अगर आप धूम्रपान छोड़ना या फिर इस बुरी आदत से बचना चाहते हैं, तो इसके लिए आप अपनी डाइट में फल और सब्जियों की संख्या बड़ा सकते हैं और उनसे ही अपना पेट भर सकते हैं। दरअसल, जब कभी भी आपका धूम्रपान करने का मन करें, तो आप धूम्रपान को छोड़कर फल और सब्जियों का सेवन कर सकते हैं, या फिर इसकी जगह साबुत अनाज का सेवन कर सकते हैं। यह आपको धूम्रपान की लगी आदत को छोड़ने में काफी ज्यादा सहयता प्रदान करेगा।

निष्कर्ष

गलत आदतें अपनाने की वजह से लोगों को अक्सर कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। रोजाना बहुत ज्यादा धूम्रपान करने की वजह से दिमाग का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है, जिसमें आपको रक्तस्राव स्ट्रोक जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है, इससे आपके मरने का खतरा भी बढ़ सकता है। पिल्स के बारे में जानकर, खुद को एक ब्रेक देकर और फल और सब्जियों का सेवन करके आप धूम्रपान को छोड़ सकते हैं। अगर आपको भी धूम्रपान के कारण दिमाग में किसी भी तरह की, रक्तस्रावी स्ट्रोक जैसी समस्या हो गयी है और आप इस समस्या का इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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अष्टांग योग करने से दिमाग शांत और तनाव मुक्त रहता है, जाने इसके फायदे

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अष्टांग योग आमतौर पर सबसे बढ़िया और लोकप्रिय योग शैलियों में से एक माना जाता है। दरअसल, अष्टांग योग करने से हमारा दिमाग शांत और तनाव मुक्त रहता है। इस को मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। इसे करने से आप दिनभर ऊर्जावान और शारीरिक तौर पर मजबूत महसूस करते हैं। दरअसल, इसका रोजाना अभ्यास आपके मन को सकारात्मक विचारों से भर देता है। यह आपके ध्यान और एकाग्रता में काफी ज्यादा सुधार लाता है और दिमागी तौर पर हमारे ध्यान को केंद्रित करता है। इसकी सहायता से आपकी मांसपेशियों और जोड़ों में भी मजबूती आती है और साथ में यह शरीर का फैट तेजी से कम करने और आपके दिमागी संतुलन को बढ़ाने में मदद करता है। इसका नियमित अभ्यास आपको कई तरह के तनावों से छुटकारा दिलाता है। इसके अलावा यह शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत बनाता है और शरीर को लचीला बनाने में मददगार साबित होता है। आमतौर पर, जब आप इस तरह के योग से शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ और फिट होने का अहसास करते हैं, तो इससे आपका दिमाग भी काफी ज्यादा शांत रहता है। तो आइये इस लेख के माध्यम से अष्टांग योग को कैसे किया जा सकता है और इसके क्या -क्या फायदे हो सकते हैं, इसके बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। 

अष्टांग योग के फायदे 

वैसे तो, अष्टांग योग के कई फायदे होते है, जिस की सहायता से आप न केवल तनाव से छुटकारा पा सकते हैं, बल्कि, पढ़ाई-लिखाई करने वाले बच्चे अपने मन को एकाग्र कर सकते हैं और बड़ी से बड़ी परेशानियों को आसानी से हल कर पाते हैं। इसके कुछ फायदे इस प्रकार हैं:

  1. अष्टांग योग की सहायता से आपको फोकस और एकाग्रता बढ़ाने में मदद प्राप्त होती है। 
  1. दिनभर की गतिविधियों से होने वाली थकान और तनाव से आप दूर रहे सकते हैं। 
  1. इसके नियमित अभ्यास से आपको काफी अच्छी नींद आती है। 
  1. आपका दिमाग फालतू की चीजों को नहीं सोचता वह शांत रहता है। 
  1. अष्टांग योग की सहायता से आप आसानी से अपने वजन को कम कर सकते हैं। 
  1. इससे, हमारा हाई ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है। 

अष्टांग योग करने का तरीका 

बेशक, अष्टांग योग के अनेकों फायदे होते हैं और इसको करने से दिमाग शांत और तनाव मुक्त रहता है। पर आम तौर पर, यह एक कठिन प्रकार का योग होता है। अगर आप इस का अभ्यास करने की सोच रहे हैं, तो आपको सब से पहले इसकी मूल बातों को समझना होगा और इसको शुरू करने से पहले आपको मैसूर शैली का अष्टांग योग करना होगा। इसको करने के लिए आप योग गुरुओं की सहायता ले सकते हैं, इसकी मदद से आप अपनी रूटीन और बनतर को सुधार सकते हैं, जिससे कि आपको सहनशक्ति, फुर्ती और लचीलापन प्राप्त होता है। अष्टांग योग की कोशिश करने से पहले हठ योग या फिर आयंगर योग जैसे कम गहन अभ्यास आपके लिए एक अच्छे विकल्प हो सकते हैं। 

निष्कर्ष: 

जिम्मेदारिओं के चलते ज्यादातर लोग तनाव और चिड़चिड़ेपन में रहते हैं। अपने दिमाग को शांत और तनाव मुक्त रखने के लिए आप अष्टांग योग का सहारा ले सकते हैं। यह मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होता है। रोजाना अष्टांग योग का अभ्यास करने से दिनभर की गतिविधियों से होने वाली थकान और तनाव से छुटकारा मिलता है, काफी अच्छी नींद आती है, और इससे कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज भी कंट्रोल होती है। अष्टांग योग करने का तरीका बहुत ही अलग और एक कठिन प्रकार का योग होता है। इसके लिए आप योग गुरूओं की सहायता ले सकते हैं। अगर यह योग करने के बावजूद भी आपका तनाव कम नहीं हो रहा है, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर आप इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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क्या दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है टॉयलेट में फोन चलाना? डॉक्टर से जाने कैसे

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आज कल फोन हमारी जिंदगी के लिए एक बहुत ही बड़ी जरूरत बनकर खड़ा हो गया है। चाहे लोगों को सुबह उठते ही खबर पढ़नी हो, दिनभर सोशल मीडिया स्क्रॉल करना हो या फिर रात को सोने से पहले वीडियो को देखना हो, आम तौर पर हमारा दिमाग हर वक्त स्क्रीन से जुड़ा रहता है। दरअसल फोन से एक पल भी दूर रह पाना लोगों के लिए बहुत ज्यादा मुश्किल सा हो गया है। यह बात सच है, कि सोने से पहले के आखिरी मिनट तक ज्यादातर लोग फोन में रील्स को स्क्रोल कर रहे होते हैं। 

एक बार के लिए इसको भी ठीक माना जा सकता है, पर स्थिति जब बिगड़ जाती है, जब यह देखा जाता है की मोबाइल फोन की यह लत लोगों पर इस कदर हावी हो गई है, की कुछ लोग टॉयलेट में भी फ़ोन चलाने से खुद को रोक नहीं पाते हैं। आम तौर पर यह आदत आपकी सेहत के लिए बिल्कुल भी अच्छी नहीं है। आपकी यह आदत सिर्फ हाइजीन की नज़र से ही गलत नहीं है, बलकि यह आपकी मेंटल हेल्थ और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी काफ़ी ज्यादा नुक्सानदायक हो सकती है। 

अगर आप भी टॉयलेट में फोन लेकर जाते हैं, तो जरा सोचिये की यह वाकई आपके लिए बहुत जरूरी है, या फिर आपको इसकी लत लग चुकी है? बता दें कि कई लोगों का मानना है, कि टॉयलेट में फोन के बिना वक्त को काटना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है, इसलिए वह टॉयलेट में सोशल मीडिया, ईमेल या फिर गेम्स को खेल कर अपने वक्त को बिताते हैं। पर छोटी सी लगने वाली यह बात आपके दिमाग को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। असल में टॉयलेट इस्तेमाल करते वक्त अपने साथ में मोबाइल का उपयोग करना अपनी सेहत के साथ एक तरिके का खिलवाड़ है। आइये इस लेख के माध्यम से डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी लेंगे कि मानसिक स्वास्थ्य और दिमाग के लिए टॉयलेट में फोन का उपयोग करना आखिर कैसे नुकसानदायक हो सकता है? 

टॉयलेट में फोन का उपयोग मेंटल हेल्थ और दिमाग के लिए कैसे है नुकसानदायक?

जब आप टॉयलेट में मोबाइल फोन को लेकर जाते है, तो अक्सर आप जरूरत से ज्यादा यहां पर समय बिताने लग जाते हैं, जो कि आपके लिए बिल्कुल भी सही नहीं होता है। दरअसल टॉयलेट में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना कई तरीकों से हमारे दिमाग और हमारी मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकता है, जैसे कि, 

  1. दिमाग का ओवर स्टिम्युलेशन

आमतौर जब आप टॉयलेट में होते हैं, तो उस वक्त आपका शरीर आराम की स्थिति में जाने की कोशिश करता है, पर टॉयलेट में फ़ोन का इस्तेमाल करने से ऐसा नहीं हो पाटा है, क्योंकि इस दौरान फोन से दिमाग को लगातार नई जानकारी मिलती रहती है। इसकी वजह से न्यूरॉन्स जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं, जिसके कारण आपके दिमाग को बिल्कुल भी आराम नहीं मिल पाता है। जिसकी वजह से आपको मेंटल फटीग और एंग्जाइटी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। 

  1. दिमाग के फोकस करने की क्षमता कमजोर होती है 

दरअसल टॉयलेट में लगातार फोन लेजाने और फोन पर स्क्रॉल करने की आदत से दिमाग के फोकस करने की क्षमता पर बहुत ज्यादा असर पड़ता है। जैसे किसी काम को बार -बार अधूरा छोड़ देना, यह ठीक वैसे ही होता है। आमतौर पर धीरे- धीरे इस आदत का आपके ध्यान और एकाग्रता पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। इसकी वजह से आपकी याददाश्त भी कमजोर होने लग जाती है। इसके साथ ही आपके सोचने की क्षमता भी कम होने लगती है। 

  1. तनाव और चिंता को बढ़ाता है

असल में टॉयलेट में मोबाइल फोन को चलना तनाव और चिंता को बढ़ाने का कारण बनता है, जैसे टॉयलेट में बैठकर सोशल मीडिया पर कुछ न कुछ स्क्रॉल करते रहना, काम की ईमेल को चेक करना या फिर बैठे बैठे उनको पड़ना यह आपके तनाव के  लेवल को बढ़ाने का काम कर सकता है, जो आपकी सेहत के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं होता है। विशेष रूप से जब आप कोई निगेटिव खबर को पढ़ते हैं या फिर अपने काम से जुड़ी चिंताओं पर ध्यान देते हैं, तो इसकी वजह से आपके मानसिक तनाव को बढ़ावा मिल सकता है।

  1. दिमाग और शरीर के बीच खराब तालमेल 

अगर टॉयलेट में जाकर आपका ध्यान पूरे तरीके से अपने फोन पर ही रहता है, तो फिर टॉयलेट  का उपयोग करते वक्त आपके दिमाग और शरीर के बीच का तालमेल खराब हो सकता है। मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की वजह से आपके पाचन तंत्र पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है और इसके साथ ही आपको पेट में कब्ज जैसी परेशानियां हो सकती हैं। 

मेंटल हेल्थ पर पड़ने वाले अन्य नुकसान

  1. एक अध्यन के अनुसार टॉयलेट में फोन का इस्तेमाल करना से आपकी मेंटल हेल्थ पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। हालाँकि जो समय आप टॉयलेट में बैठकर खुद के लिए एक सोच विचार के रुप में दे सकते थे, वह पूरा समय आप मोबाइल फोन में लगकर खराब कर देते हैं। इस वजह से ही इस आदत का प्रभाव आपकी  मेटल हेल्थ पर भी पड़ता है। 
  2. टॉयलेट में लगातार आप का छोटे-छोटे वीडियो या फिर पोस्ट देखना, दरअसल इससे आपका दिमाग बहुत तेजी से डोपामाइन रिलीज करने लग जाता है। जिसकी वजह से आपको धीरे धीरे सिर्फ फोन ही आपकी ख़ुशी का स्रोत लगने लग जाता है। इसके कारण आपको फोन की लत लग जाती है और आपका दिमाग इतना ज्यादा एक्टिव नहीं रह पाता है। 
  3. दरअसल टॉयलेट में मोबाइल फोन उपयोग करने की आदत आमतौर पर आपके दिमाग के पैटर्न को बुरी तरीके से प्रभावित करती है, जिसकी वजह से आपकी नींद की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है। 
  4. टॉयलेट में या फिर कहीं पर भी फोन का बार बार इस्तेमाल करना आपको अपनों से भी दूर कर सकती है। इसके कारण आपको धीरे-धीरे लोगों से या फिर अपनों से बात करने की जगह फोन सबसे ज्यादा जरूरी लगने लग जाता है।

इस आदत से अपना बचाव कैसे करें

टॉयलेट में फोन ले जाने की आदत से अगर आप अपना बचाव करना चाहते हैं, तो इन उपायों को जरूर अपनाएं। 

  1. आप अपने मोबाइल फोन को टॉयलेट में लेकर जाना पूरी तरह बंद करें।
  2. अगर टॉयलेट में आपको समय बिताना बहुत मुश्किल लगता या फिर बोरियत लगती है, तो उस वक्त आप कोई किताब या मैगजीन को पड़ें। 
  3. आमतौर पर टॉयलेट को एक आरामदायक जगह की तरह लें, जहां पर आपका दिमाग भी आराम कर सके। 
  4. टॉयलेट में किसी भी जगह पर मोबाइल फोन पर वक्त बिताने की बजाए आप माइंडफुलनेस प्रैक्टिस करें। इससे आपका दिमाग शांत होगा और किसी काम को करने में आपका मन लगेगा। 
  5. इस दौरान अगर आपको खुद पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है, तो इस दौरान आप स्क्रीन टाइम ट्रैकिंग ऐप्स की मदद ले सकते हैं। 
  6. दरअसल टॉयलेट में फ़ोन चलना आपके लिए एक छोटी सी बात हो सकती है, पर आपकी यह आदत धीरे-धीरे आपके दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर अपना गहरा प्रभाव डाल सकती है। इसलिए यह आपके लिए अच्छा होगा कि आप इस आदत को समय रहते छोड़ दें। 

निष्कर्ष

आज कल फ़ोन सभी लोगों की जरुरत बन चूका है। कोई भी काम फ़ोन के बिना लोगों से होता ही नहीं है, इसलिए फोन से एक पल भी दूर रहना लोगों के लिए बहुत ज्यादा मुश्किल सा हो गया है। अपने काम के लिए, मनोरंजन के लिए फ़ोन का इस्तेमाल करना यहां तक ही ठीक रहता है, लेकिन लोगों का इसका इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा जैसे टॉयलेट में भी मोबाइल फ़ोन का उपयोग करना, यह मानसिक सेहत और दिमाग के लिए नुक्सानदायक होता है। इसको फ़ोन की लत लगना भी कहा जा सकता है। टॉयलेट में मोबाइल फोन को चलना तनाव और चिंता का कारण बनता है और इससे, दिमाग की फोकस करने की क्षमता कमजोर होती है और इसके साथ ही दिमाग और शरीर के बीच खराब तालमेल बनता है। इससे अपना बचाव करने के लिए आप टॉयलेट में फोन ले जाना पूरी तरह बंद कर दें, टॉयलेट में समय बिताना बोरियत लगता है, तो आप कोई किताब या मैगजीन को पड़ें और अगर खुद पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है, तो इस दौरान आप स्क्रीन टाइम ट्रैकिंग ऐप्स की मदद ले सकते हैं।  अगर आपको भी टॉयलेट में फ़ोन ले जाने की लत लगी हुई है, तो आप तुरंत इससे अपना बचाव करें और किसी अच्छे डॉक्टर से जाकर इसके बारे में सलाह लें, अगर आप भी इसके बारे में ज्यादा जानकरी प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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ब्रेन स्ट्रोक कितने प्रकार के होते है, इसके प्रमुख लक्षण, कारण और कैसे किया जाता है इलाज ?

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ब्रेन स्ट्रोक मस्तिष्क से जुड़ा एक गंभीर विकार है, जिसमें मस्तिष्क को पूर्ण रूप रक्त प्राप्त नहीं पाता है, जिसकी वजह से मस्तिष्क के हिस्से में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी होने लग जाती है और मस्तिष्क की कोशिकाएं मरने लग जाती है | ब्रेन स्ट्रोक को रोकने के लिए स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना, नियमित रूप से व्यायाम करना, संतुलित आहार का सेवन करना और शराब और धूम्रपान जैसे नशीली पदार्थों का सेवन करने बचना बेहद महत्पूर्ण होता है | आइये जानते है ब्रेन स्ट्रोक की समस्या को विस्तारपूर्वक से :- 

 

ब्रेन स्ट्रोक क्या होता है ? 

ब्रेन स्ट्रोक मस्तिष्क से जुडी एक गंभीर और चिकित्सकीय आपातकालीन स्थिति होती है, जिसमें किसी कारणवश मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त प्रवाह बाधित होने लग जाता है | जिसकी वजह से मस्तिष्क के उस हिस्से ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और मस्तिष्क की कोशिकाएं मरने लग जाती है | ब्रेन स्ट्रोक के कारण मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से के अनुसार पीड़ित व्यक्ति को विभिन्न शरीरिक और मानसिक स्थिति से गुजरना पड़ जाता है, जैसे की बोलने में परेशानी होना, सुनने की क्षमता का कम होना, चलने- फिरने में कठिनाई होनी, सोचने की क्षमता को खोना, शरीरिक विकलांगता, यादाशत कमज़ोर होना यहाँ तक की इससे मरीज़ की मृत्यु भी हो सकती है | 

 

इसलिए पीड़ित व्यक्ति के लिए यह ज़रूरी होता है की ब्रेन स्ट्रोक से जुड़े लक्षणों का पता लगते ही तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और अपना इलाज करवाएं, क्योंकि ब्रेन स्ट्रोक का सटीक उपचार उसकी प्रकृति पर निर्भर करता है | आइये जानते है ब्रेन स्ट्रोक के मुख्य लक्षण और कारण क्या है :- 

ब्रेन स्ट्रोक के प्रकार, लक्षण और इलाज: जानें सब कुछ

ब्रेन स्ट्रोक के मुख्य लक्षण क्या है ? 

ब्रेन स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित है :- 

 

  • बोलने, सुनने और समझने की क्षमता का कमज़ोर होना | 
  • आंखों की दृष्टि से जुड़ी समस्या 
  • चलने-फिरने में परेशानी होना | 
  • असहनीय सिरदर्द होना 
  • भ्रम या फिर चेतना में बदलाव 

 

ब्रेन स्ट्रोक होने के मुख्य कारण क्या है ? 

ब्रेन स्ट्रोक होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित है :- 

 

  • इस्केमिक स्ट्रोक :- यह स्ट्रोक होने के सबसे आम कारण है | जब मस्तिष्क में मौजूद धमनिया किसी कारणवश अवरुद्ध हो जाती है, तो इससे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह काफी कम हो जाता है, इस स्थिति को इस्केमिक स्ट्रोक के नाम से भी जाना जाता है | 

 

  • रक्तस्रावी स्ट्रोक :- जब मस्तिष्क की रक्त वाहिकाएं में रिसाव होने या फिर फटने की वजह से रक्त प्रवाह में गड़बड़ी हो जाती है, तो इसे रक्तस्रावी स्ट्रोक कहा जाता है | यह रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करने वाली कई स्थितियों के परिणामस्वरूप हो सकता है |       

 

ब्रेन स्ट्रोक होने के कुछ जोखिम कारक

ब्रेन स्ट्रोक होने के कुछ जोखिम कारक ऐसे भी है, जो इस स्थिति को बढ़ावा देने का कार्य करते है, जिनमें शामिल है :- 

  • मोटापा 
  • मधुमेह की समस्या 
  • तनावपूर्ण जीवन होना 
  • शराब का अधिक मात्रा में सेवन करने से 
  • रक्तचाप का उच्च स्तर होना और कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर होना 
  • हृदय संबंधी समस्या का होना 
  • बढ़ती उम्र 
  • अनुवांशिक कारणों से 
  • तंबाकू और धूम्रपान का सेवन करने से आदि |         

 

ब्रेन स्ट्रोक कितने प्रकार के होते है ?          

ब्रेन स्ट्रोक मुख्य रूप से दो प्रकार के होते है, पहला है इस्केमिक स्ट्रोक और दूसरा है रक्तस्रावी स्ट्रोक | इसके अलावा ब्रेन स्ट्रोक के कुछ प्रकार इस तरह भी है :- 

 

  • थ्रोम्बोटिक स्ट्रोक :- जब मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में थक्का जमा होने लग जाता है, तो इस स्थिति को थ्रोम्बोटिक स्ट्रोक कहा जाता है | 

 

  • एम्बोलिक स्ट्रोक :- जब शरीर के किसी और हिस्से से निर्मित खून के थक्के मस्तिष्क के रक्त वाहिकाओं में जाकर रुक जाते है तो इस स्थिति को एम्बोलिक स्ट्रोक कहा जाता है | 

 

  • ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक :- यह स्थिति अपेक्षाकृत हलके प्रकार का स्ट्रोक होता है, जिससे मस्तिष्क के रक्त प्रवाह में किसी कारणवश अस्थायी रुकावट होने लग जाती है |   

 

ब्रेन स्ट्रोक से बचाव कैसे करें ? 

ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें पड़ने पर आपातकालीन चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता पड़ जाती है, क्योंकि मरीज़ का जितनी जल्दी उपचार होगा, उतना ही जल्दी वह व्यक्ति ब्रेन स्ट्रोक से रिकवर हो पायेगा | लेकिन कुछ ऐसे उपाय मौजूद है, जिसके अनुसरण से ब्रेन स्ट्रोक से खुद का बचाव किया जा सकता है :- 

 

  • प्रतिदिन स्वस्थ आहार का सेवन करें 
  • नियमित रूप से योगासन और व्यायाम का अभ्यास करें 
  • धूम्रपान का सेवन करना बंद कर दें 
  • शराब के सेवन कम करें 
  • अपने मधुमेह की समस्या में प्रबंधन करें 
  • नियमित रूप से मोटापे को कम करें 
  • तनाव में प्रबंधन करें 
  • रोज़ाना 7 से 8 घंटे की नींद पूरी करें          
  • अपने स्वास्थ्य की नियमित रूप से जांच करवाते रहे

 

ब्रेन स्ट्रोक का कैसे किया जाता है इलाज ? 

ब्रेन स्ट्रोक का इलाज इस प्रकार पर निर्भर करता है, क्योंकि कई तरीकों से ब्रेन स्ट्रोक का इलाज किया जाता है, जिनमें शामिल है :- 

 

  • रक्तस्रावी स्ट्रोक के इलाज के लिए, दवाओं से मस्तिष्क के रक्त वाहिकाओं में रक्त के थक्के बनाये जाते है | इसके अलावा मस्तिष्क में जमा रक्त को निकालने के लिए या फिर दबाव को कम करने के लिए सर्जरी को करने की आवश्यकता भी पड़ जाती है | 

 

  • इस्केमिक स्ट्रोक के इलाज के लिए, रक्त के थक्के को घोलने वाले दवाओं का उपयोग किया जाता है | इसके अलावा एंडोवस्कुलर थ्रोम्बेक्टोमी नामक प्रक्रिया का उपयोग करके थक्के को हटाया जाता है | 

 

  • मस्तिष्क में उत्पन्न सूजन को कम करने के लिए एंटीहाइपरटेंसिव दवाओं और और IV तरल पदार्थ का उपयोग किया जाता है | 

 

  • धमनीशिरापरक विकृति यानी एवीएम को हटाने के लिए या फिर सिकोड़ने के लिए सर्जरी या विकीकरण प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है |

 

  • सूजन को कम करने और खोपड़ी के अस्थायी हिस्से को हटाने के लिए क्रोनियोटॉमी सर्जरी को करने की आवश्यकता भी पड़ सकती है |      

 

ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर बीमारी है, इसलिए इससे जुड़े लक्षणों का सही समय पर पहचान करना और इलाज करवाना एक पीड़ित व्यक्ति के लिए बेहद ज़रूरी होता है | एक स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने और नियमितरूप से डॉक्टर से जांच-पड़ताल करवाने से ब्रेन स्ट्रोक से बचाव किया जा सकता है | यदि आप या फिर आपका कोई भी परिजन ब्रेन स्ट्रोक से जुड़े लक्षणों से गुजर रहा है तो इलाज के लिए आप डॉक्टर अमित मित्तल से परामर्श कर सकते है | 

डॉक्टर अमित मित्तल न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर के सीनियर कंसल्टेंट और पंजाब के बेहतरीन ब्रेन एंड स्पाइन सर्जन स्पेशलिस्ट में से एक है, जो पिछले 15 वर्षों से पीड़ित मरीज़ों का स्थायी रूप से इलाज कर रहे है | इसलिए आज ही न्यूरो लाइफ ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर की ऑफिसियल पर जाएं और परामर्श के लिए तुरंत अपनी अप्पोइन्मनेट को बुक करें | इसके आप वेबसाइट में मौजूद नंबरों से भी संपर्क कर सकते है | 

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एक सर्वश्रेष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट से मिले इलाज के बाद माता-पिता ने दी अपनी यात्रा के बारे में संपूर्ण जानकारी

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न्यूरो ब्रेन लाइफ एंड स्पाइन सेंटर ने अपने यूट्यूब चैनल में पोस्ट एक वीडियो के माध्यम से यह दिखाया गया की कैसे इलाज के बाद मिले परिणाम से मरीज़ के माता-पिता बेहद खुश है और इलाज करने के लिए वह न्यूरोसर्जन में स्पेशलिस्ट डॉक्टर अमित मित्तल का शुक्रगुज़ार कर रहे है | 

इस वीडियो में उन माता-पिता ने अपने बच्चे को हुए परेशानी के बारे में बताते हुए यह कहा कि कुछ समय पहले एक दुर्घटना होने के कारण उनके बच्चे के दिमाग में फ्रैक्चर आ गया था, जिसकी  वजह से उनके बच्चे के पूरे सिर में सूजन आ गयी थी | हालांकि उन्होंने समय रहते अपने बच्चे इलाज तो करवा लिया था, लेकिन इलाज के बाद कुछ समय बाद उनके बच्चे को दौरे की समस्या होने लग गयी थी, जो अब हर दिन उनके बच्चे को काफी प्रभावित कर रही थी | अनेकों जगह इलाज और परीक्षण करवाने के बाद उन्हें कहीं से न्यूरो ब्रेन लाइफ एंड स्पाइन सेंटर के बारे पता चला और समय को व्यर्थ न करते हुए वह अपने बच्चे को लेकर इस संस्थान में इलाज के लिए पहुंच गए | 

 

इस संस्थान में उनकी मुलाकात डॉक्टर अमित मित्तल से हुई जो की न्यूरोसर्जन में स्पेशलिस्ट है, जिन्होंने उनके बच्चे की स्थिति की पूरी जाँच पड़ताल कर उन्हें दुराप्लास्टी सर्जरी करवाने की सलाह दी | हलाकि सर्जरी सुन कर पहले तो वह काफी डर गए थे लेकिन डॉक्टर अमित मित्तल ने उन माता-पिता को यह अस्वाशन दिया की सर्जरी के बाद उनका बच्चा संपूर्ण से ठीक हो सकता है | इसलिए उन्होंने डॉक्टर पर भरोसा कर सर्जरी करवाने का निर्णय लिया | उनके बच्चे की सर्जरी सफलतापूर्वक से हुई और उनके बच्चे को इस सर्जरी से किसी भी तरह के दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ा | आज उनका बच्चा बिलकुल ठीक है और सर्जरी से मिले परिणाम से वह दोनों माता-पिता बेहद खुश है | उनकी सलाह यही है की यदि कोई भी व्यक्ति दिमाग या फिर रीढ़ की हड्डी से जुड़ी किसी भी प्रकार की समस्या से गुज़र रहा है तो वह अपने इलाज न्यूरो ब्रेन लाइफ एंड स्पाइन सेंटर के डॉक्टर अमित मित्तल से ही करवाए |